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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

U.S. Military Action and Venezuela’s Response: A Strategic Geopolitical Analysis

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और वेनेज़ुएला की प्रतिक्रिया: एक सामरिक विश्लेषण परिचय दक्षिण अमेरिका का ऊर्जा-संपन्न राष्ट्र वेनेज़ुएला पिछले एक दशक से राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक गिरावट और बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों के बीच घिरा हुआ है। हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत में कथित ड्रग-तस्करी नौकाओं पर की गई सैन्य कार्रवाइयों ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और गंभीर बना दिया है। इन हमलों में कई लोगों की मौत हुई और ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया कि नौसैनिक हमलों का दायरा आगे चलकर वेनेज़ुएला की भूमि तक भी पहुँच सकता है। इसके जवाब में, वेनेज़ुएला की राष्ट्रीय सभा ने इन घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष आयोग गठित किया है, जिसने इसे राष्ट्र की संप्रभुता पर सीधा हमला बताते हुए “कठोर और गहन जांच” की घोषणा की है। ऐसे समय में, अमेरिकी सैन्य शक्ति और वेनेज़ुएला की क्षमताओं का तुलनात्मक विश्लेषण करना आवश्यक हो जाता है, ताकि संभावित परिदृश्यों को समझा जा सके। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का संदर्भ अमेरिका लंबे समय से वेनेज़ुएला सरकार पर ड्रग तस्करी मे...

U.S. Military Intervention in Venezuela: Capture of President Nicolás Maduro — 2026 Crisis Explained

वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप: 3 जनवरी 2026 को निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी — एक ऐतिहासिक मोड़ 3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेज़ुएला में एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को विशेष बलों ने पकड़ लिया। यह घटना लैटिन अमेरिका में 1989 में पनामा पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद सबसे प्रत्यक्ष सैन्य दख़ल के रूप में देखी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी बलों ने “ बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक और विशेष ऑपरेशन ” के माध्यम से मादुरो को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया है। यह कार्रवाई न सिर्फ़ वेनेज़ुएला की राजनीति के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए भी एक निर्णायक क्षण बन गई है। पृष्ठभूमि: बढ़ते तनाव से सैन्य कार्रवाई तक का सफर अमेरिका और मादुरो सरकार के बीच तनाव कई वर्षों से चल रहा था। 2020 से मादुरो और उनके नज़दीकी सहयोगियों पर अमेरिकी अदालतों में नार्को-टेररिज़्म और ड्रग तस्करी से जुड़े आरोप लं...

US Strike on Venezuela: Maduro’s Capture, International Law and Geopolitical Implications

अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला पर हमला और मदुरो की गिरफ्तारी: एक विस्तृत विश्लेषण परिचय 3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर “Operation Absolute Resolve” नामक सैन्य अभियान चलाया, जिसमें वेनेज़ुएला की राजधानी काराकस में भारी एयर स्ट्राइक की गई और वहां से राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को पकड़कर अमेरिका ले जाया गया। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक राजनीति तथा अंतरराष्ट्रीय क़ानून की सीमाएँ गंभीर रूप से प्रश्नों के घेरे में आ गईं हैं। यह कार्रवाई सिर्फ एक सैन्य संघर्ष नहीं थी बल्कि संप्रभुता, शक्ति राजनीति और न्याय के सिद्धांतों के बीच एक निर्णायक संघर्ष बन चुकी है। 📌 ऐतिहासिक और संदर्भ वेनेज़ुएला–अमेरिका संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं: 1999 में ह्यूगो चावेज़ के सत्ता संभालने के बाद वेनेज़ुएला ने सोशलिस्ट नीति अपनाई, जिससे अमेरिका के साथ मतभेद बढ़े। मदुरो के शासन को अमेरिका हमेशा अवैध, तानाशाही और नारको-राज्य के रूप में मानता रहा है। 2020 में अमेरिका ने मदुरो पर नार्को-आतंकवाद एवं कोकीन तस्करी के आरोप लगाए और उस समय से ही गिरफ्तारी के लिए इ...

Venezuela’s Socio-Economic Collapse: Hyperinflation, Poverty, and Political Repression Amid External Tensions (2025–26 Analysis)

वेनेज़ुएला में सामाजिक-आर्थिक संकट: अतिमहंगाई, गरीबी और राजनीतिक उत्पीड़न के बीच डूबता राष्ट्र सारांश तेल संपन्नता के बावजूद वेनेज़ुएला आज गहरे सामाजिक और आर्थिक अंधकार में डूबा है। 2026 तक महंगाई दर 680% से अधिक पहुँचने का अनुमान है, जबकि 70% परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। राज्य-प्रायोजित उत्पीड़न ने असहमति की आवाज़ों को दबा दिया है। यह विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), यूनिवर्सिडाड कैटोलिका आंद्रेस बेलो (UCAB) और अन्य स्रोतों के नवीनतम आँकड़ों पर आधारित है। यह बताता है कि आर्थिक विनाश, सामाजिक पतन और राजनीतिक निरंकुशता एक-दूसरे को सुदृढ़ कर रहे हैं। पुनर्बहाली के लिए केवल आर्थिक स्थिरीकरण नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक पुनर्संरचना और मानवीय सहयोग आवश्यक है। 1. परिचय: तेल से आतंक तक की यात्रा एक समय जब वेनेज़ुएला लैटिन अमेरिका का सबसे धनी राष्ट्र कहा जाता था, वही देश अब इतिहास के सबसे गंभीर शांतिकालीन आर्थिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। 2013 से 2024 के बीच इसका वास्तविक GDP लगभग 75% गिर चुका है (IMF, 2025)। राष्ट्रीय मुद्रा बोलिवार का मूल्य लगभग समाप्त हो ...

Cuba–US Relations 2025: Rising Diplomatic Tensions Amid the Russia–Ukraine War and Global Power Shifts

क्यूबा और अमेरिका: शीतयुद्ध की छाया में नई कूटनीतिक टकराहट अमेरिका और क्यूबा के संबंध हमेशा से द्वंद्व और अविश्वास के बीच झूलते रहे हैं। शीतयुद्ध के दौरान जन्मी यह शत्रुता आज भी अमेरिकी विदेश नीति के कठोर रुख में दिखाई देती है। 1960 के दशक से जारी अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध (Embargo) न केवल क्यूबा की अर्थव्यवस्था को कमजोर करते रहे हैं, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में अमेरिका की नीतियों पर सवाल भी खड़े करते रहे हैं। 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ यह पुराना विवाद एक बार फिर गर्मा गया है—लेकिन इस बार इसका संदर्भ शीतयुद्ध नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा है। रूस के साथ क्यूबा की निकटता और नई विवाद रेखा रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने राजनयिकों को संयुक्त राष्ट्र में उस वार्षिक प्रस्ताव के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जो पिछले तीन दशकों से अमेरिका के क्यूबा प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग करता रहा है। इस बार अमेरिका का तर्क है कि क्यूबा रूस के साथ मिलकर यूक्रेन युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल...

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U.S. Military Intervention in Venezuela: Capture of President Nicolás Maduro — 2026 Crisis Explained

वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप: 3 जनवरी 2026 को निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी — एक ऐतिहासिक मोड़ 3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेज़ुएला में एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को विशेष बलों ने पकड़ लिया। यह घटना लैटिन अमेरिका में 1989 में पनामा पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद सबसे प्रत्यक्ष सैन्य दख़ल के रूप में देखी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी बलों ने “ बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक और विशेष ऑपरेशन ” के माध्यम से मादुरो को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया है। यह कार्रवाई न सिर्फ़ वेनेज़ुएला की राजनीति के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए भी एक निर्णायक क्षण बन गई है। पृष्ठभूमि: बढ़ते तनाव से सैन्य कार्रवाई तक का सफर अमेरिका और मादुरो सरकार के बीच तनाव कई वर्षों से चल रहा था। 2020 से मादुरो और उनके नज़दीकी सहयोगियों पर अमेरिकी अदालतों में नार्को-टेररिज़्म और ड्रग तस्करी से जुड़े आरोप लं...

Why India Needs a Shadow Cabinet: Strengthening the Role of Opposition in a Modern Democracy

वर्तमान में भारत में विपक्ष की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता एक समग्र अकादमिक विश्लेषण परिचय लोकतंत्र की आत्मा सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन में निहित होती है। जहां सत्तारूढ़ दल शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन का दायित्व निभाता है, वहीं विपक्ष का कार्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की समीक्षा, आलोचना और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना होता है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष ‘नकारात्मक शक्ति’ नहीं, बल्कि रचनात्मक नियंत्रक (Constructive Watchdog) की भूमिका निभाता है। भारत, जो स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र घोषित करता है, आज एक ऐसे राजनीतिक चरण से गुजर रहा है जहाँ विपक्ष की भूमिका कमजोर, बिखरी हुई और प्रतिक्रियात्मक दिखाई देती है। संसद के भीतर विमर्श का स्तर गिरा है और नीति-आलोचना प्रायः नारेबाज़ी या वॉकआउट तक सीमित रह जाती है। ऐसे परिदृश्य में छाया मंत्रिमंडल (Shadow Cabinet) की अवधारणा भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को संस्थागत, संगठित और प्रभावी बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। यह लेख भारत में छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता, उसके संभा...

Yemen Crisis 2025: Saudi-UAE Rift Deepens with Mukalla Strike & UAE Withdrawal

यमन संकट का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: सऊदी–यूएई मतभेद और बदलता क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रस्तावना यमन का संघर्ष केवल समकालीन सत्ता-संघर्ष की कहानी नहीं है; यह औपनिवेशिक विरासत, जनजातीय राजनीति, वैचारिक ध्रुवीकरण, क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता और भू-राजनीतिक हस्तक्षेपों से उपजा एक दीर्घकालिक ऐतिहासिक संकट है। दिसंबर 2025 में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच उत्पन्न हालिया तनाव—जिसमें सऊदी-नीत गठबंधन ने मुकल्ला बंदरगाह पर यूएई से जुड़े हथियारों की शिपमेंट को लक्ष्य बनाकर हवाई हमला किया, और उसके बाद यूएई ने अपनी सेना की वापसी की घोषणा की—इस जटिल इतिहास की अगली कड़ी है। इस घटना ने यमन और खाड़ी क्षेत्र की राजनीति को नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां पूर्व सहयोगी अब प्रतिस्पर्धी बन चुके हैं। इस निबंध का उद्देश्य है—यमन संकट की ऐतिहासिक जड़ों, आंतरिक सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना, क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका और हालिया घटनाओं के व्यापक निहितार्थों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करना। हम ऐतिहासिक तथ्यों, हाल की घटनाओं और सांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर इस संकट को अधिक स्पष्ट रूप से समझेंगे, जिसमें क्...

One China Policy & Strategic Ambiguity: The Taiwan Strait Crisis Explained

One China Policy, Strategic Ambiguity और ताइवान स्ट्रेट में उभरता संकट (अमेरिका–चीन–ताइवान संबंधों का एक एकीकृत भू-राजनीतिक विश्लेषण) भूमिका: एक द्वीप, अनेक वैश्विक तनाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ भू-क्षेत्र ऐसे होते हैं जो अपने भौगोलिक आकार से कहीं अधिक रणनीतिक भार वहन करते हैं। ताइवान ऐसा ही एक द्वीप है—जिसकी भौगोलिक स्थिति सीमित, किंतु राजनीतिक, आर्थिक और वैचारिक प्रासंगिकता वैश्विक है। 21वीं सदी में जब विश्व व्यवस्था बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है और अमेरिका–चीन प्रतिद्वंद्विता वैश्विक राजनीति की केंद्रीय धुरी बन चुकी है, तब ताइवान केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं रह जाता, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन, तकनीकी प्रभुत्व और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बन जाता है। इस त्रिकोणीय संबंध को समझने के लिए दो अवधारणाएँ निर्णायक हैं— One China Policy और Strategic Ambiguity । दशकों तक इन दोनों ने युद्ध को टालने और Status Quo बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किंतु हालिया घटनाएँ, विशेषकर 18 दिसंबर 2025 को अमेरिका द्वारा ताइवान को 11.1 अरब डॉलर की हथियार बिक्री , यह संकेत देती हैं कि यह संतुलन...

India vs Reliance-BP: KG Basin Gas Production Dispute — Energy Policy, Arbitration and Resource Governance Analysis

भारत सरकार बनाम रिलायंस–बीपी: कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस उत्पादन विवाद का एक व्यापक विश्लेषण प्रस्तावना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आयात-निर्भरता में कमी और स्वदेशी उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने के संदर्भ में कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन का D6 ब्लॉक एक ऐतिहासिक परियोजना के रूप में देखा गया। वर्ष 2000 में इस ब्लॉक को उत्पादन-साझेदारी अनुबंध (PSC) के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज को आवंटित किया गया, जिसे भारत का पहला बड़ा गहरे समुद्री गैस-उत्पादन प्रोजेक्ट माना गया था। इससे न केवल घरेलू गैस आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद थी, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में निजी-सार्वजनिक भागीदारी की नई संभावनाएँ भी दिखाई दी थीं। लेकिन समय के साथ यह परियोजना तकनीकी, आर्थिक और संविदात्मक विवादों में घिरती चली गई। नवीनतम घटनाक्रम (दिसंबर 2025) में भारत सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी साझेदार कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) से कथित उत्पादन-कमी के लिए 30 अरब डॉलर से अधिक के मुआवजे की मांग की है। यह विवाद 2016 से एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित है, जिसकी अंतिम सुनवाई नवंबर 2025 में पूरी हुई, और निर्णय 2026 के ...

UPSC Aspirants Motivation Guide 2026: New Beginnings, Discipline, and Success Mindset

UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रेरक संदेश — 2026 की नई उड़ान, नई सोच, नया संकल्प UPSC की यात्रा किसी साधारण मंज़िल की यात्रा नहीं होती। यह वह मार्ग है जहाँ धैर्य, आत्मविश्वास, संघर्ष, त्याग, अनुशासन और निरंतरता—सबकी एक साथ परीक्षा होती है। कई बार यह रास्ता लंबा लगता है, कई बार ऐसा लगता है कि सब छूट रहा है, पर याद रखिए— जो रास्ता कठिन होता है, वही आपको असाधारण बनाता है। 2026 आपके लिए सिर्फ कैलेंडर का नया पन्ना नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत का अवसर है। 🔴 1️⃣ नकारात्मकता से मुक्ति — “Delete negative people & thoughts” UPSC की तैयारी के दौरान सबसे बड़ा संघर्ष बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि अपनी भीतरी शंकाओं से होता है। लोग कहेंगे — 👉 “बहुत मुश्किल है” 👉 “तुमसे नहीं होगा” 👉 “इतने लोग पास नहीं होते” लेकिन वे आपको नहीं जानते — वे आपकी मेहनत, जिद, संघर्ष और जुनून नहीं जानते। इसलिए — ✔ तुलना मत कीजिए ✔ आलोचनाओं को महत्व मत दीजिए ✔ अपनी यात्रा पर फोकस रखिए 🛑 नकारात्मक लोगों से दूरी ही नहीं, 💡 नकारात्मक विचारों को भी मन से निकालना सीखिए। याद रखें — आपका लक्ष्य आपका है...

India Becomes the World’s 4th Largest Economy: Overtakes Japan, Closes Gap with Germany

भारत की अर्थव्यवस्था: जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना प्रस्तावना 31 दिसंबर 2025 भारत की आर्थिक यात्रा के इतिहास में एक उल्लेखनीय पड़ाव के रूप में दर्ज हो गया। सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत की नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (Nominal GDP) $4.18 ट्रिलियन के स्तर पर पहुँच गई है, जिसके साथ ही भारत ने जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान प्राप्त कर लिया। यह उपलब्धि संयोग नहीं, बल्कि लगभग एक दशक से जारी नीतिगत सुधारों, मजबूत घरेलू मांग, स्थिर मैक्रो-प्रबंधन और उद्यमशील ऊर्जा का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, विशेषकर IMF के पूर्वानुमानों ने भी संकेत दिया था कि संरचनात्मक सुस्ती और मुद्रा-दबाव से जूझ रही जापानी अर्थव्यवस्था की तुलना में भारत की वृद्धि तेज बनी रहेगी। इस संदर्भ में 2025 को वास्तव में एक “परिभाषित वर्ष” कहा जा सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की वर्तमान स्थिति 2025 के अंत तक नाममात्र GDP के आधार पर वैश्विक परिदृश्य broadly इस प्रकार उभरता है— संयुक्त राज्य अमेरिका — लगभग $30.5 ट्रिलियन चीन — लगभग $...

India–Pakistan Confidence Building Measures: Nuclear Sites & Prisoners List Exchange Amid Tensions

भारत–पाकिस्तान संबंधों में विश्वास-निर्माण की निरंतरता: परमाणु स्थापनाओं और बंदियों की सूचियों का आदान-प्रदान परिचय भारत और पाकिस्तान दक्षिण एशिया की सुरक्षा संरचना के केंद्र में स्थित दो परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। इतिहास गवाह है कि दोनों के संबंधों में युद्ध, संघर्ष, सीमा झड़पें और राजनीतिक अविश्वास की गहरी परतें रही हैं। 1947, 1965, 1971 और 1999 के युद्धों से लेकर समय-समय पर हुए सैन्य तनाव तक, द्विपक्षीय रिश्ते बार-बार टकराव के मोड़ पर पहुँचे हैं। इसके बावजूद कुछ ऐसे विश्वास-निर्माण उपाय (Confidence Building Measures – CBMs) हैं, जो राजनीतिक तनाव के चरम समय में भी जारी रहे हैं। 1 जनवरी 2026 को दोनों देशों द्वारा परमाणु स्थापनाओं तथा बंदियों की सूचियों के आदान-प्रदान का कदम इसी निरंतरता का प्रमाण है। यह आदान-प्रदान ऐसे समय हुआ है जब मई 2025 के चार दिवसीय सैन्य टकराव — जिसे भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया — ने संबंधों को अभूतपूर्व तलहटी तक पहुँचा दिया था। फिर भी, इस परिस्थिति में भी ऐसे तंत्रों का जारी रहना अपने-आप में महत्वपूर्ण संदेश देता है। परमाणु स्थापनाओं पर हमले न कर...

US–Iran Tensions Rise After Trump’s Warning to ‘Protect Iranian Protesters’: A Geopolitical Analysis

ट्रंप की ‘प्रदर्शनकारियों को बचाने’ की चेतावनी और ईरानी प्रतिक्रिया: वैश्विक शक्ति-राजनीति के बीच उभरता तनाव जनवरी 2026 की शुरुआत में ही अमेरिका-ईरान संबंध नई तल्ख़ी में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं। 2 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में सख्त लहजे में बयान देते हुए कहा कि यदि ईरानी शासन “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है”, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उन्हें “बचाने आएगा” और “हम लॉक्ड एंड लोडेड हैं” — यानी सैन्य प्रतिक्रिया के लिए तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान गहरे आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और मुद्रा-संकट से गुजर रहा है, जिसके कारण देश-भर में असंतोष की लहर फैल चुकी है। आर्थिक संकट से उपजा असंतोष: विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए ये प्रदर्शन शुरुआत में महँगाई और गिरती क्रय-शक्ति के खिलाफ आर्थिक आक्रोश के रूप में उभरे। ईरानी रियाल ऐतिहासिक रूप से कमजोर हुआ, डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 1.4–1.5 मिलियन रियाल प्रति डॉलर के स्तर तक पहुँच गई। इसके...

White-Collar Terrorism in India: Rajnath Singh Warns After Red Fort Blast Involving Doctors

आतंकवाद का बदलता स्वरूप: शिक्षित वर्ग की संलिप्तता और नीतिगत परिवर्तनों की आवश्यकता परिचय आतंकवाद एक वैश्विक चुनौती है जो समय के साथ अपने रूप, रणनीतियों और भागीदारों में परिवर्तन करता रहा है। पारंपरिक रूप से, आतंकवाद को अशिक्षित या आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों से जोड़ा जाता था, जहां गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक असंतोष मुख्य कारक माने जाते थे। हालांकि, हाल के वर्षों में, 'व्हाइट कॉलर टेररिज्म' का उदय एक नई प्रवृत्ति को इंगित करता है, जहां शिक्षित पेशेवर—जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और प्रोफेसर—आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त पाए जा रहे हैं। भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 'व्हाइट कॉलर टेररिज्म' पर जताई गई चिंता, विशेष रूप से दिल्ली के रेड फोर्ट में हुए कथित कार बम धमाके के संदर्भ में, जहां आरोपी पेशेवर डॉक्टर थे और उनके पास RDX पाया गया, इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती है। यह लेख इस प्रश्न की जांच करता है कि क्या आतंकवाद का स्वरूप अब शिक्षित वर्ग तक पहुंच चुका है और क्या इसे रोकने के लिए नीतियों में बदलाव आवश्यक है। यह विश्लेषण ऐतिहासिक संदर्भ, empiric साक्ष्य और...