अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा समझौता: इंडो-पैसिफिक में नई रणनीतिक एकता की शुरुआत भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल ही में संपन्न हुआ रक्षा समझौता केवल एक द्विपक्षीय दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक उभरते वैश्विक समीकरण का संकेत है। यह उस रणनीतिक दिशा की पुष्टि करता है जिसमें लोकतांत्रिक शक्तियाँ अब इंडो–पैसिफिक क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए एकजुट हो रही हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलियाई उप–प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स द्वारा हस्ताक्षरित यह समझौता दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं को परिचालन स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम है। “हम बहुत उत्साहित हैं,” रिचर्ड मार्ल्स के ये शब्द केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस नये विश्वास का प्रतीक हैं जो दिल्ली और कैनबरा के बीच पनप रहा है। सामरिक गहराई की ओर एक निर्णायक कदम इस समझौते का सबसे बड़ा उद्देश्य दोनों सेनाओं की परस्पर संचालनक्षमता (interoperability) को मजबूत करना है। अब दोनों देशों के रक्षा कमांड एक-दूसरे के साथ सीधे स्टाफ वार्ताएँ करेंगे — यानी सहयोग अब केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युद्ध-प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग औ...