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बिहार में माइक्रोफाइनेंस कर्जजाल: NRLM की असफलता या सिस्टमिक समस्या? भूमिका: कर्ज का पहाड़ और मिटती उम्मीदें मुजफ्फरपुर जिले की 38 वर्षीय रेखा देवी कभी नहीं सोच सकती थीं कि अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए लिया गया 50,000 रुपये का छोटा-सा कर्ज कुछ ही वर्षों में 3.2 लाख रुपये के बवंडर में बदल जाएगा। हर महीने 8,000 रुपये चुकाने के बावजूद उनका कर्ज घटने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। ब्याज दर? 28–32 प्रतिशत प्रति वर्ष। रेखा अकेली नहीं हैं— CRISIL-MFIN की रिपोर्ट बताती है कि बिहार की 68% SHG महिलाएँ इसी तरह के कर्ज चक्र में फँस चुकी हैं , जहाँ से बाहर निकलना लगभग असंभव होता जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या यह NRLM की विफलता है या पूरी माइक्रोफाइनेंस व्यवस्था की गहरी सिस्टमिक समस्या ? माइक्रोफाइनेंस मॉडल: सशक्तिकरण से कर्जजाल तक भारत में माइक्रोफाइनेंस की संरचना तीन स्तरों पर आधारित है— SHG (Self-Help Groups) : 10–15 महिलाओं का बचत समूह MFI (Microfinance Institutions) : SHG को बड़ा कर्ज देने वाली संस्थाएँ बैंक : PSL के अंतर्गत MFIs को पूंजी उपलब्ध करवाते हैं बैंक MFIs को 8–12% ब...