भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
ट्रंप का ग्रीनलैंड पर यू-टर्न: राहत की सांस लेता यूरोप, पर भू-राजनीतिक आशंकाएँ बरकरार भूमिका अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति, भूगोल और संसाधनों का संगम अक्सर अप्रत्याशित संकटों को जन्म देता है। ग्रीनलैंड जैसे दूरस्थ, विरल आबादी वाले लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र आज वैश्विक महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा के केंद्र में हैं। जनवरी 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर अपनाए गए आक्रामक रुख और उसके बाद अचानक लिए गए यू-टर्न ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि समकालीन विश्व व्यवस्था में स्थिरता से अधिक अनिश्चितता स्थायी तत्व बनती जा रही है। ट्रंप का यह कदम भले ही तत्काल यूरोप के लिए राहत लेकर आया हो, लेकिन इसने ट्रांस-अटलांटिक संबंधों, NATO की एकता और आर्कटिक क्षेत्र की भविष्य की राजनीति को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ग्रीनलैंड: भूगोल से परे रणनीति ग्रीनलैंड केवल बर्फ से ढका एक विशाल द्वीप नहीं है; यह 21वीं सदी की भू-राजनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। उत्तर अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के संगम पर स्थित यह क्षेत्र अमेरिका, यूरोप और ...