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India’s ₹3.25 Trillion Rafale Deal: Strategic Rationale, Security Imperatives and Defence Indigenisation
भारत का ₹3.25 लाख करोड़ का राफेल सौदा: रणनीतिक औचित्य का एक अकादमिक विश्लेषण परिचय 12 फरवरी 2026 को भारत की रक्षा नीति में एक निर्णायक मोड़ तब आया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों की खरीद को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। अनुमानित ₹3.25 लाख करोड़ की लागत वाला यह सौदा न केवल भारत के अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक है, बल्कि यह भारतीय वायु सेना (IAF) की दीर्घकालिक क्षमताओं, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी गहराई से प्रभावित करता है। इस सौदे के अंतर्गत 88 एकल-सीट और 26 दोहरी-सीट राफेल विमान शामिल हैं। इनमें से कुछ विमान पूर्णतः निर्मित अवस्था में भारत को प्राप्त होंगे, जबकि लगभग 90 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिसमें स्वदेशी सामग्री, निजी क्षेत्र की भागीदारी और तकनीकी हस्तांतरण (ToT) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह लेख राफेल सौदे को केवल एक रक्षा खरीद के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता, आर्...