भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
✈️ वैश्विक मोबिलिटी और Henley Passport Index 2026 — एक शैक्षणिक विश्लेषण जनवरी 2026 में जारी Henley Passport Index ने एक बार फिर वैश्विक यात्रा की स्वतंत्रता में गहरी असमानता को उजागर किया है। यह इंडेक्स, जो International Air Transport Association (IATA) के विशेष Timatic डेटा पर आधारित है, दुनिया के 199 पासपोर्ट्स को 227 गंतव्यों तक वीज़ा-मुक्त (या वीज़ा-ऑन-अराइवल) पहुंच के आधार पर रैंक करता है। 20 वर्ष पूरे होने पर यह रिपोर्ट बताती है कि पिछले दो दशकों में कुल वैश्विक मोबिलिटी बढ़ी है, लेकिन इसका लाभ असमान रूप से वितरित हुआ है। शीर्ष और सबसे निचले पासपोर्ट के बीच अब 168 गंतव्यों का अंतर है — 2006 में यह केवल 118 था। यह विभाजन केवल यात्रा की सुविधा का मामला नहीं, बल्कि कूटनीतिक विश्वास, आर्थिक शक्ति, राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का जीवंत प्रतिबिंब है। 🌍 वैश्विक मोबिलिटी का बढ़ता विभाजन रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में रिकॉर्ड संख्या में पासपोर्ट शीर्ष पर एकत्रित हो रहे हैं, जबकि निचले स्तर के पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक तेजी से अलग-थलग पड़ रहे हैं। सिंगापुर जैसे देशो...