अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
पंजाब की बाढ़: किसानों की तबाही और पुनर्जनन की राह (निबंधात्मक लेख – UPSC दृष्टिकोण से) प्रस्तावना: अन्न भंडार का संकट पंजाब, जिसे भारत का अन्न भंडार कहा जाता है, अपनी उपजाऊ मिट्टी और मेहनती किसानों की बदौलत देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ रहा है। सतलज, ब्यास और रावी नदियों की गोद में बसा यह राज्य हरित क्रांति का प्रतीक है। लेकिन सितंबर 2025 की भयावह बाढ़ ने इस स्वर्णिम पहचान को गहरी चोट पहुंचाई। खेतों में लहलहाती फसलें जलमग्न हो गईं, किसानों के चेहरों पर निराशा छा गई, और पंजाब का हरा-भरा सपना झीलों में तब्दील हो गया। यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संकट है, जो हमें दीर्घकालिक समाधानों की ओर सोचने को मजबूर करता है। बाढ़ का विनाशकारी स्वरूप सितंबर 2025 की बाढ़ ने पंजाब के 23 जिलों में तबाही मचाई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.93 लाख हेक्टेयर (करीब 4.77 लाख एकड़) कृषि भूमि जलमग्न हो गई। 2,000 से अधिक गांव पानी की चपेट में आए, 50-55 लोगों की जान गई, और करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए। प्रारंभिक अनुमान बताते हैं कि ₹13,800 करोड़ का नुकसान हुआ, ज...