हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
Global Child Deprivation Crisis: Key Insights from UNICEF’s State of the World’s Children 2025 Report
वैश्विक बाल-वंचना का संकट: UNICEF की ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2025’ रिपोर्ट का विश्लेषण भूमिका संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा विश्व बाल दिवस (20 नवंबर 2025) के अवसर पर जारी की गई रिपोर्ट “The State of the World’s Children 2025: Ending Child Poverty – Our Shared Imperative” वैश्विक बाल-वंचना पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त करती है। रिपोर्ट के अनुसार, निम्न और मध्यम-आय वाले देशों में हर पाँच में से एक से अधिक बच्चा, अर्थात् लगभग 400 मिलियन बच्चे, स्वास्थ्य, विकास और समग्र कल्याण के लिए आवश्यक कम से कम दो बुनियादी कारकों से वंचित हैं। यह आंकड़ा न केवल गरीबी की बहु-आयामी प्रकृति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मौजूदा वैश्विक विकास ढांचे में बच्चों के अधिकार किस तरह संकटग्रस्त बने हुए हैं। बहु-आयामी बाल-वंचना की प्रकृति रिपोर्ट का प्रमुख योगदान यह है कि यह बाल गरीबी को केवल आय आधारित मानकों से नहीं, बल्कि बहु-आयामी वंचनाओं के समुच्चय के रूप में समझती है। इसमें निम्नलिखित कारक शामिल हैं— उचित पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण, सुरक्षित आवास एवं ...