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Transgender Bill 2026: Rushed Legislation or Threat to Rights? Privacy, Consent & NALSA Judgment Analysis
ट्रांसजेंडर अधिकार संशोधन विधेयक 2026: आत्म-पहचान की छीनती हुई स्वतंत्रता और लोकतंत्र की सच्ची परीक्षा संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। मात्र 13 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक 24 मार्च को लोकसभा में और 25 मार्च को राज्यसभा में वॉयस वोट से पास हो गया—विरोधी दलों के वॉकआउट और समुदाय के तीखे विरोध के बीच। यह घटनाक्रम मात्र कानूनी संशोधन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता, संवैधानिक मूल्यों और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति संवेदनशीलता की गंभीर परीक्षा है। 2014 के ऐतिहासिक नालसा बनाम भारत संघ फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को ‘तीसरे जेंडर’ के रूप में मान्यता दी और जेंडर पहचान को आत्म-निर्धारण का मौलिक अधिकार करार दिया। इसके आधार पर 2019 का ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम लाया गया, जिसमें स्व-घोषणा (self-identification) को केंद्र में रखा गया। लेकिन 2026 का संशोधन इस आधारभूत सिद्धांत को चुनौती देता है। अब ट्रांसजेंडर की परिभ...