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आतंकवाद का बदलता स्वरूप: शिक्षित वर्ग की संलिप्तता और नीतिगत परिवर्तनों की आवश्यकता परिचय आतंकवाद एक वैश्विक चुनौती है जो समय के साथ अपने रूप, रणनीतियों और भागीदारों में परिवर्तन करता रहा है। पारंपरिक रूप से, आतंकवाद को अशिक्षित या आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों से जोड़ा जाता था, जहां गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक असंतोष मुख्य कारक माने जाते थे। हालांकि, हाल के वर्षों में, 'व्हाइट कॉलर टेररिज्म' का उदय एक नई प्रवृत्ति को इंगित करता है, जहां शिक्षित पेशेवर—जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और प्रोफेसर—आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त पाए जा रहे हैं। भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 'व्हाइट कॉलर टेररिज्म' पर जताई गई चिंता, विशेष रूप से दिल्ली के रेड फोर्ट में हुए कथित कार बम धमाके के संदर्भ में, जहां आरोपी पेशेवर डॉक्टर थे और उनके पास RDX पाया गया, इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती है। यह लेख इस प्रश्न की जांच करता है कि क्या आतंकवाद का स्वरूप अब शिक्षित वर्ग तक पहुंच चुका है और क्या इसे रोकने के लिए नीतियों में बदलाव आवश्यक है। यह विश्लेषण ऐतिहासिक संदर्भ, empiric साक्ष्य और...