अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत की अर्थव्यवस्था: आईएमएफ के संशोधित अनुमान और विकास की नई व्याख्या — एक संपादकीय दृष्टिकोण भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर वैश्विक विमर्श के केंद्र में है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया जाना केवल एक सांख्यिकीय संशोधन नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है, जो पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर आकार ले चुका है। यह संशोधन ऐसे समय आया है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापार युद्धों, भू-राजनीतिक तनावों, उच्च ब्याज दरों और आपूर्ति शृंखला के पुनर्संयोजन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। इसके बावजूद भारत का अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन यह बताता है कि घरेलू आर्थिक आधार अब पहले से कहीं अधिक लचीला और आत्मनिर्भर हो चुका है। वृद्धि के पीछे की अर्थव्यवस्था आईएमएफ के आकलन का आधार भारत का हालिया आर्थिक प्रदर्शन है। जुलाई–सितंबर 2025 की तिमाही में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि और पहली छमाही में औसतन 8 प्रतिशत की दर यह दर्शाती है कि घरेलू मांग अभी भी अर्थव्यवस्था की प्रमुख प्...