अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
तालिबान विदेश मंत्री की भारत यात्रा: एक ऐतिहासिक कदम और इसके निहितार्थ 10 अक्टूबर 2025 को, तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा शुरू की, जो 2021 में तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद से किसी वरिष्ठ तालिबानी नेता की भारत की पहली यात्रा है। यह यात्रा न केवल भारत-अफगानिस्तान संबंधों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और तालिबान शासन की वैश्विक स्वीकार्यता की तलाश को भी रेखांकित करती है। इस लेख में हम इस यात्रा के महत्व, इसके संभावित परिणामों और भारत की विदेश नीति के संदर्भ में इसके निहितार्थों का विश्लेषण करेंगे। यात्रा का पृष्ठभूमि संदर्भ अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से भारत ने वहां की स्थिति पर सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। 2021 में तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के बाद भारत ने अपने दूतावास को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था, लेकिन मानवीय सहायता और अफगान जनता के साथ ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने के लिए तकनीकी मिशन के माध्यम से संपर्क बनाए रखा। भारत ने अफगानिस्तान...