अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
बिम्सटेक 2025 : एशिया के सहयोग की नई संभावनाएँ परिचय बिम्सटेक (BIMSTEC) — Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation — एक ऐसा क्षेत्रीय संगठन है, जो बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देशों को आपस में जोड़ता है। इसकी स्थापना 6 जून 1997 को थाईलैंड के बैंकॉक में हुई थी, और इसके सदस्य देश हैं: भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार और थाईलैंड। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। 4 अप्रैल 2025 को थाईलैंड के बैंकॉक में बिम्सटेक की छठी शिखर बैठक आयोजित की गई, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं प्रधानमंत्रियों ने भाग लिया। यह बैठक इसलिए विशेष थी क्योंकि यह कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार प्रत्यक्ष रूप से आयोजित की गई थी। इसका मुख्य विषय था — “समृद्ध, लचीला और खुला बिम्सटेक” । बैंकॉक विज़न 2030: भविष्य की नींव इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय था “बैंकॉक विज़न 2030” को अपनाना। यह दस्तावेज़ बिम्सटेक के भावी लक्ष्यों, प्राथमिकताओं और सहयोग के क्षेत्रों को स्पष्ट करता है। इसमें पारस्परिक व्यापार, ऊर्जा सहयोग, परिवह...