अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
ब्रिजिट बार्डो: सिनेमा की क्रांति, स्वतंत्रता का प्रतीक और विवादों से घिरी विरासत प्रस्तावना फ्रांसीसी सिनेमा के स्वर्णकाल में यदि किसी एक अभिनेत्री ने संस्कृति, समाज और सौंदर्य–बोध को गहराई से झकझोरा, तो वह नाम था — ब्रिजिट बार्डो (Brigitte Bardot) । जिन्हें प्रेमपूर्वक “ बी.बी. ” कहा जाता था। 28 सितंबर 1934 को पेरिस में जन्मी बार्डो सिर्फ अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक लहर थीं, जिसने 20वीं सदी के यूरोप में स्त्री की स्वतंत्र पहचान और यौन स्वायत्तता पर गहन बहस छेड़ दी। 28 दिसंबर 2025 को 91 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया — यह सूचना उनकी संस्था Brigitte Bardot Foundation ने दी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उन्हें “शताब्दी की किंवदंती” और “स्वतंत्रता का प्रतीक” बताते हुए श्रद्धांजलि दी। सिनेमाई उदय: स्त्री-स्वतंत्रता की नई परिभाषा सिर्फ 21 वर्ष की आयु में बार्डो ने 1956 की फिल्म “एंड गॉड क्रिएटेड वुमन” से वैश्विक प्रसिद्धि हासिल की। पति और निर्देशक रोज़र वादिम द्वारा निर्देशित इस फिल्म में उनका निर्भीक भावभंगिमा, सहज देह-भाषा और मुक्त व्यक्तित्व उस सम...