अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
इजरायल-हमास समझौता — शांति की ओर पहला कदम या क्षणिक राहत? गाजा की जर्जर धरती पर पहली बार वर्षों बाद शांति की एक हल्की आहट सुनाई दी है। इजरायल और हमास के बीच हाल में हुए युद्धविराम समझौते ने दुनिया भर में उम्मीद और संशय दोनों को जन्म दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस समझौते को “ऐतिहासिक उपलब्धि” कहे जाने और उनके मध्य पूर्व दौरे की घोषणा ने इसे और अधिक सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन सवाल वही पुराना है — क्या यह वास्तव में स्थायी शांति की दिशा में पहला ठोस कदम है, या फिर केवल एक क्षणिक राजनीतिक राहत ? 1. समझौते की रूपरेखा: राहत की शुरुआत समझौते के प्रथम चरण में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है — गाजा और दक्षिणी इजरायल में पूर्ण युद्धविराम , बंधकों और कैदियों की अदला-बदली , और इजरायली सेना की गाजा से चरणबद्ध वापसी । इन प्रावधानों ने तत्काल मानवीय राहत की उम्मीद जगाई है। गाजा, जो पिछले दो वर्षों से लगातार बमबारी, नाकेबंदी और विस्थापन का सामना कर रहा था, अब पुनर्वास और पुनर्निर्माण की उम्मीद देख रहा है। बंधकों की रिहाई का पहलू विशेष रूप से भावनात्मक और र...