अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
चीन का एआई-संचालित सैन्य अनुसंधान: डीपसीक के माध्यम से स्वायत्त ड्रोन स्वार्म और रोबोट कुत्तों का उदय (एक गहन शैक्षणिक विश्लेषण) प्रस्तावना 21वीं सदी का युद्धक्षेत्र केवल बंदूकों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म और डेटा इंटेलिजेंस से संचालित हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) का सैन्यीकरण आज वैश्विक शक्ति-संतुलन का नया केंद्र बन चुका है। अमेरिका और चीन जैसे महाशक्तियों के बीच यह प्रतिस्पर्धा अब पारंपरिक हथियारों की नहीं, बल्कि “स्वायत्त निर्णय क्षमता” और “एल्गोरिद्मिक प्रभुत्व” (Algorithmic Dominance) की हो गई है। हाल के वर्षों में, चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के माध्यम से एआई-संचालित सैन्य अनुसंधान को जिस तीव्रता से आगे बढ़ाया है, उसने वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। विशेष रूप से डीपसीक (DeepSeek) जैसे उन्नत भाषा और निर्णय-आधारित एआई मॉडल का प्रयोग चीन के सैन्य और औद्योगिक ढांचे में एक बड़ा परिवर्तनकारी तत्व बन चुका है। इस विश्लेषण में हम चीन की एआई रणनीति, डीपसीक की भूमिका, स्वायत्त ड्रोन स्वार्म और रोबोट कुत्तों जैसी प्रम...