अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
गाजा युद्ध और इज़रायल की वैश्विक स्थिति: बदलती धारणा और अमेरिकी विवशता परिचय 5 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने CBS News के कार्यक्रम “Face the Nation” में कहा — “चाहे आप इसे उचित मानें या नहीं, आप इस युद्ध के इज़रायल की वैश्विक स्थिति पर पड़े प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।” यह कथन मात्र कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस वास्तविकता की स्वीकारोक्ति है जिसे अब अमेरिका भी अनदेखा नहीं कर पा रहा — कि गाजा युद्ध ने इज़रायल को अभूतपूर्व वैश्विक आलोचना और कूटनीतिक अलगाव की स्थिति में ला खड़ा किया है। युद्ध की पृष्ठभूमि गाजा युद्ध की जड़ें 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़रायल पर किए गए हमले में निहित हैं, जिसमें लगभग 1,200 नागरिक मारे गए और 250 से अधिक बंधक बनाए गए। इज़रायल की जवाबी कार्रवाई ने गाजा को खंडहर में बदल दिया। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अब तक 67,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुरुआती हफ्तों में ही चेताया था कि नागरिक हताहतों की यह स...