अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस): विवादों का इतिहास, कानूनी स्थिति और समकालीन भारत में वैचारिक तनाव परिचय भारत की राजनीतिक और वैचारिक संरचना में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक ऐसा संगठन है जिसने लगभग एक शताब्दी से सत्ता, संस्कृति और समाज के बीच की सीमाओं को परिभाषित किया है। 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित, आरएसएस का घोषित उद्देश्य था – “हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्रनिर्माण” । लेकिन समय के साथ इसकी गतिविधियाँ, विचारधारा और प्रभाव भारतीय लोकतंत्र में गहरे विवाद का विषय बन गए। नवंबर 2025 तक दो घटनाओं ने एक बार फिर आरएसएस को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है — महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े राहुल गांधी के बयान पर चल रहा मानहानि मामला , और संगठन की अपंजीकृत कानूनी स्थिति को लेकर कांग्रेस और अन्य दलों द्वारा उठाए गए सवाल। ये विवाद केवल कानूनी या राजनीतिक नहीं हैं, बल्कि वे भारत की आत्मा—धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद—के बीच चल रहे वैचारिक संघर्ष के प्रतीक हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: आरएसएस, हिंदुत्व और गांधी हत्या का विवाद 30 जनवरी 1948 को...