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End of Hereditary Peers in the House of Lords: A Historic Reform in British Parliamentary Democracy

हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...

Justice Surya Kant Appointed as the 53rd Chief Justice of India: Constitutional Significance, Career Profile, and Judicial Vision

न्यायमूर्ति सूर्य कांत का भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तावना भारतीय न्यायपालिका में 30 अक्टूबर 2025 का दिन एक ऐतिहासिक तिथि के रूप में दर्ज हुआ, जब केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति सूर्य कांत को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की। वे 24 नवंबर 2025 को न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे। यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भारतीय न्यायिक परंपरा की निरंतरता और उसकी संस्थागत मर्यादा का प्रतीक है। वरिष्ठता के सिद्धांत पर आधारित यह निर्णय न्यायपालिका की आत्मनिर्भरता और संतुलित कार्यप्रणाली को पुनः पुष्ट करता है। संवैधानिक एवं प्रक्रियात्मक परिप्रेक्ष्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(2) के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। हालांकि संविधान में ‘वरिष्ठता’ का कोई औपचारिक उल्लेख नहीं है, किंतु 1970s के दशक से यह सिद्धांत न्यायिक परंपरा के रूप में स्थापित हो गया है। “Union of In...

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