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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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US Senate Blocks War Powers Resolution on Iran: Republicans Back Trump’s Military Campaign, Renewing Constitutional Debate

अमेरिकी सीनेट में वॉर पावर्स विवाद: ईरान पर ट्रंप के सैन्य अभियान को रिपब्लिकन समर्थन, संवैधानिक संतुलन पर नई बहस

अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को मजबूत समर्थन प्रदान किया है। 4 मार्च 2026 को सीनेट ने एक महत्वपूर्ण द्विदलीय (बिपार्टिसन) वॉर पावर्स रेजोल्यूशन को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के विरुद्ध चल रहे हवाई हमलों को समाप्त करना और कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के बिना किसी भी आगे की सैन्य कार्रवाई को प्रतिबंधित करना था। यह मतदान अमेरिकी राजनीति में युद्ध शक्तियों (War Powers), संवैधानिक संतुलन तथा राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच शक्ति विभाजन के लंबे विवाद को एक बार फिर से उजागर कर रहा है।

पृष्ठभूमि और संघर्ष की शुरुआत

ट्रंप प्रशासन ने इज़राइल के साथ मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं, जिसे अब "अमेरिका-इज़राइल अभियान" या "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के रूप में जाना जा रहा है। इन हमलों में ईरान के उच्चतम नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए हैं, और तेहरान सहित कई शहरों में भारी तबाही हुई है। 5 मार्च 2026 तक कम से कम 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि ईरान में हजारों मौतें रिपोर्ट की गई हैं। ट्रंप ने इन कार्रवाइयों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह) को समर्थन रोकने के लिए आवश्यक बताया है।

आलोचकों का तर्क है कि यह बिना कांग्रेस की मंजूरी के एक और "अनंत युद्ध" (forever war) की शुरुआत है, जो इराक और अफगानिस्तान की तरह लंबा खिंच सकता है और अमेरिकी संसाधनों तथा जीवन को व्यर्थ कर सकता है। रॉयटर्स/इप्सोस जैसे सर्वेक्षणों में केवल लगभग 25% अमेरिकी नागरिक इन हमलों का समर्थन करते दिखे हैं, जबकि बहुमत (50% से अधिक) मानते हैं कि ट्रंप सैन्य बल का उपयोग करने में अत्यधिक उत्सुक हैं।

प्रस्ताव और मतदान का विवरण

यह प्रस्ताव वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन द्वारा प्रमुखता से पेश किया गया था, जिसे चक शूमर, एडम शिफ और अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं ने समर्थन दिया। यह 1973 के वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के तहत लाया गया था, जो वियतनाम युद्ध के बाद कांग्रेस को युद्ध घोषणा और सैन्य कार्रवाई पर नियंत्रण देने के लिए बनाया गया था। प्रस्ताव में मांग की गई थी कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति अनिवार्य हो, और बिना मंजूरी के चल रही कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए (हालांकि आत्मरक्षा या इज़राइल की रक्षा के लिए कार्रवाई की अनुमति बरकरार रखी गई)।

4 मार्च 2026 को सीनेट में मतदान हुआ, जिसमें प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के खिलाफ 53-47 का वोट पड़ा। मतदान मुख्य रूप से पार्टी लाइनों पर हुआ: 52 रिपब्लिकन ने विरोध में वोट दिया, जबकि केवल एक रिपब्लिकन (रैंड पॉल, केंटकी) ने समर्थन किया। डेमोक्रेट्स में से 44 ने समर्थन किया, लेकिन एक डेमोक्रेट (जॉन फेटरमैन, पेंसिल्वेनिया) ने विरोध में वोट दिया।

रिपब्लिकन सीनेटरों ने तर्क दिया कि यह अभियान "सीमित" है और जल्द समाप्त हो जाएगा, जबकि प्रस्ताव अमेरिकी सैनिकों को खतरे में डाल सकता है और ईरान को प्रोत्साहन दे सकता है। सीनेटर जिम रिश जैसे नेताओं ने कहा कि "यह कोई अनंत युद्ध नहीं है, बल्कि यह बहुत जल्दी समाप्त हो जाएगा।" वहीं, डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इसे "ट्रंप द्वारा अमेरिका को एक और अनावश्यक युद्ध में धकेलने" का आरोप लगाया। टिम केन ने कहा कि प्रशासन ने कोई ठोस सबूत नहीं दिया कि अमेरिका पर तत्काल खतरा था।

दोनों पक्षों के प्रमुख तर्क

समर्थक (मुख्यतः डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन):

  • अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार युद्ध घोषित करने का विशेषाधिकार कांग्रेस को है, न कि राष्ट्रपति को अकेले।
  • बिना मंजूरी के कार्रवाई सैनिकों को अनावश्यक जोखिम में डालती है और "अनंत युद्ध" की परंपरा को जारी रखती है।
  • जनता युद्ध से थक चुकी है; सर्वेक्षण दिखाते हैं कि अधिकांश अमेरिकी नए संघर्ष नहीं चाहते।

विरोधी (मुख्यतः रिपब्लिकन):

  • राष्ट्रपति कमांडर-इन-चीफ के रूप में अमेरिकी हितों, सहयोगियों (जैसे इज़राइल) की रक्षा के लिए सीमित कार्रवाई कर सकते हैं।
  • प्रस्ताव दुश्मन को गलत संकेत देगा और सैन्य अभियान को कमजोर करेगा।
  • यह अभियान "सीमित और लक्षित" है, न कि पूर्ण पैमाने का युद्ध; ट्रंप प्रशासन ने गहराई तक हमले जारी रखने की बात कही है।

निहितार्थ और भविष्य की संभावनाएं

यह मतदान रिपब्लिकन-बहुमत वाली सीनेट में ट्रंप के सैन्य फैसलों के प्रति मजबूत पार्टी एकजुटता को दर्शाता है। यदि प्रस्ताव पास भी होता, तो ट्रंप द्वारा वीटो की संभावना थी, और इसे ओवरराइड करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता—जो वर्तमान में असंभव-सा लगता है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इसी तरह के प्रस्ताव पर 5 मार्च 2026 को मतदान होने वाला था, लेकिन वहां भी रिपब्लिकन बहुमत के कारण सफलता की संभावना कम है।

यह घटना 1973 के वॉर पावर्स रेजोल्यूशन की सीमाओं को उजागर करती है, क्योंकि पिछले दशकों में कई राष्ट्रपतियों (ट्रंप सहित) ने बिना पूर्ण कांग्रेस मंजूरी के सैन्य कार्रवाई की है। यदि ईरान संघर्ष लंबा खिंचा, तो यह नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है, जहां युद्ध-विरोधी भावनाएं डेमोक्रेट्स के पक्ष में जा सकती हैं।

संक्षेप में, अमेरिकी सीनेट के रिपब्लिकन सदस्यों ने ट्रंप के ईरान अभियान को समर्थन देकर कार्यकारी शाखा की सैन्य स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी है, जबकि डेमोक्रेट्स ने संवैधानिक संतुलन, कांग्रेस की भूमिका और अनावश्यक युद्ध की रोकथाम पर जोर दिया। यह अमेरिकी लोकतंत्र में शक्ति के विभाजन का एक जीवंत और विवादास्पद उदाहरण है, जो दिखाता है कि विदेश नीति और युद्ध के फैसले आज भी पार्टीगत विभाजन के अधीन हैं।

With Washington post Inputs

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