हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
प्रतीक जैन: सत्ता की परछाइयों में काम करने वाला दिमाग संडे स्पेशल | राजनीति, तकनीक और रणनीति की कहानी रविवार की सुबह आम तौर पर सुस्त होती है—अख़बार की मोटी परतें, चाय की भाप और राजनीति पर आधी-अधूरी बहसें। पर भारतीय राजनीति के भीतर एक दुनिया ऐसी भी है, जो कभी सुस्त नहीं होती। वहाँ हर दिन आँकड़ों की गिनती होती है, भावनाओं का विश्लेषण होता है और भविष्य की पटकथा लिखी जाती है। उसी दुनिया का एक प्रमुख नाम है— प्रतीक जैन। प्रतीक जैन उन लोगों में नहीं हैं जो मंच पर दिखें, भाषण दें या पोस्टर पर मुस्कराते नज़र आएँ। वे उन लोगों में हैं जो तय करते हैं कि मंच पर कौन होगा, क्या बोलेगा और किससे कैसे बात करेगा। वे राजनीति के उस चेहरे का प्रतिनिधित्व करते हैं जो दिखाई नहीं देता, लेकिन हर जगह असर छोड़ता है। इंजीनियर से रणनीतिकार तक रांची में जन्मा एक साधारण-सा लड़का, जिसने IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, शायद खुद भी यह नहीं जानता था कि वह एक दिन सत्ता की सबसे जटिल चालों का शिल्पकार बनेगा। इंजीनियरिंग ने उसे सिखाया—समस्या को टुकड़ों में तोड़ना, पैटर्न पहचानना और समाधान ढूँढना। यही ...