हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
असम का कार्बी आंगलोंग संकट (2025): भूमि, जातीय पहचान और जनसांख्यिकीय असुरक्षा का उभरता संकट भूमिका असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में दिसंबर 2025 के अंतिम दिनों में भड़की हिंसा ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि उत्तर-पूर्व भारत के जनजातीय क्षेत्रों में भूमि, पहचान और बाहरी प्रवास के प्रश्न कितने संवेदनशील और विस्फोटक हो चुके हैं। कोपिली नदी और उससे जुड़ा पुल, जो वर्षों से कार्बी गांवों और गैर-कार्बी बस्तियों के बीच एक भौगोलिक सीमा-रेखा की तरह मौजूद था, अचानक दो समुदायों के बीच गहरी मनोवैज्ञानिक दूरी का प्रतीक बन गया। 22 और 23 दिसंबर को हुई घटनाएं केवल दो दिनों की हिंसा नहीं थीं; यह उस असंतोष का विस्फोट था, जो लंबे समय से दबा हुआ था और जिसे संवाद और नीतिगत संजीदगी के अभाव में लगातार अनदेखा किया जाता रहा। संघर्ष की चिंगारी: भूख हड़ताल और विवादित भूमि का सवाल हिंसा की पृष्ठभूमि की शुरुआत पहेलंगपी गांव से होती है, जहां 6 दिसंबर से नौ कार्बी युवक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि ग्राम ग्रेजिंग रिजर्व (VGR) और प्रोफेशनल ग्रेजिंग र...