अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
दैनिक समसामयिकी लेख संकलन व विश्लेषण: 7 मई 2025 आज के इस अंक में निम्नलिखित 5 लेखों को संकलित किया गया है।सभी लेख UPSC लेबल का दृष्टिकोण विकसित करने के लिए बेहद उपयोगी हैं। 1-भारत-यू.के. मुक्त व्यापार समझौता: एक नई आर्थिक और रणनीतिक उड़ान परिचय भारत और यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) के बीच हाल ही में हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और दोहरा कराराधान संधि (Double Taxation Convention) एक ऐतिहासिक कदम है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊँचाइयों पर ले जाता है। यह समझौता, जो लंबी और गहन वार्ताओं का परिणाम है, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में भारत और यू.के. को एक मजबूत, समावेशी और भविष्योन्मुखी साझेदारी की राह दिखाता है। यह न केवल व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और रणनीतिक जुड़ाव को भी गहरा करेगा। समझौते का स्वरूप और उसकी आत्मा मुक्त व्यापार समझौता (FTA): यह समझौता दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। सीमा शुल्क में कटौती, व्यापारिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण और बाजार तक बे...