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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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US-Iran Nuclear Deal Claim: Trump Says Tehran May Hand Over Enriched Uranium After Ceasefire

अमेरिका-ईरान परमाणु समझौता: सीजफायर के बाद ट्रंप का दावा—ईरान सौंप सकता है संवर्धित यूरेनियम अप्रैल 2026 के इस जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य में मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक शक्ति-संतुलन की कसौटी बनकर उभरा है। लगभग दो महीने तक चले अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच भीषण संघर्ष, उसके बाद घोषित दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम, और अब उसके समाप्त होते ही उभरते नए दावे—ये सभी घटनाएं केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाली हैं। इसी संदर्भ में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किया गया “न्यूक्लियर डस्ट” संबंधी दावा चर्चा के केंद्र में है, जिसने कूटनीति, सुरक्षा और परमाणु राजनीति के नए आयाम खोल दिए हैं। “न्यूक्लियर डस्ट” का अर्थ और राजनीतिक संकेत ट्रंप द्वारा प्रयुक्त शब्द “न्यूक्लियर डस्ट” कोई तकनीकी शब्द नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक अभिव्यक्ति प्रतीत होती है। इसका आशय ईरान के उस संवर्धित यूरेनियम भंडार से है, जो उसकी परमाणु क्षमता का मूल आधार रहा है। यदि वास्तव में ईरान इस सामग्री को सौंपने के लिए सहमत हुआ है, तो यह केवल एक सामरिक समझौता नहीं, बल्कि उसकी परमाणु नीति में एक ऐतिहासिक म...

US-Iran Ceasefire 2026: Temporary Truce or Path to Lasting Peace in West Asia?

अमेरिका–ईरान सीजफायर 2026: अस्थायी विराम या कूटनीतिक पुनर्जागरण? अप्रैल 2026। पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध और शांति के बीच की उस धुंधली रेखा पर खड़ा है जहाँ हर कदम इतिहास रच सकता है या फिर पुरानी गलतियों को दोहरा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम (सीजफायर) पहली नज़र में राहत का संकेत है, लेकिन गहन विश्लेषण यह बताता है कि यह कोई स्थायी शांति नहीं, बल्कि दोनों महाशक्तियों की थकान, रणनीतिक गणना और भविष्य की वार्ता का एक अस्थायी पुल है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित यह विराम पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान के 10-बिंदु प्रस्ताव पर आधारित है। लेकिन क्या यह वास्तव में “शांति की शुरुआत” है या केवल “अगले दौर के संघर्ष का पूर्वाभास”? यह लेख इसी प्रश्न को समग्र रूप से समझने का प्रयास है। 1. युद्ध की जड़ें: शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय प्रभुत्व का टकराव 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क (हिजबुल्लाह, हूती, हमास) और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त रणनीति चरम पर पहुँच गई। ईरान ने इसे “अस्तित्...

Iran Rejects Temporary Ceasefire, Demands Permanent Peace in US-Israel Conflict: Strategic Analysis

अस्थायी ठहराव नहीं, स्थायी समाधान: ईरान की कूटनीति का नया संकेत प्रस्तावना मध्य पूर्व के उथल-पुथल भरे परिदृश्य में 6 अप्रैल 2026 का घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ के रूप में उभरता है। तेहरान द्वारा अमेरिकी प्रस्ताव पर अपना औपचारिक उत्तर इस्लामाबाद के माध्यम से सौंपना केवल एक राजनयिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुविचारित रणनीतिक संकेत है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अस्थायी संघर्षविराम जैसे अल्पकालिक समाधानों को अस्वीकार करता है और केवल स्थायी शांति की गारंटी वाले समझौते को ही स्वीकार्य मानता है। यह रुख न केवल वर्तमान संघर्ष की प्रकृति को रेखांकित करता है, बल्कि भविष्य की कूटनीतिक दिशा भी तय करता है। संघर्ष की जटिल पृष्ठभूमि फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुआ यह संघर्ष शीघ्र ही बहुआयामी युद्ध में बदल गया, जिसमें प्रत्यक्ष सैन्य हमलों के साथ-साथ प्रॉक्सी संघर्ष, साइबर हमले और आर्थिक दबाव शामिल हैं। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के जवाब में तेहरान ने भी आक्रामक प्रतिरोध का प्रदर्शन किया है। इस बीच, नागरिक हताहतों की बढ़ती संख्या और बुनियादी ढांचे के विनाश ने मानवीय...

Middle East War Escalation 2026: US-Iran Ground Conflict, Global Oil Risk & Strategic Impact Analysis

मिडिल ईस्ट युद्ध 2026: अमेरिका-ईरान जमीनी संघर्ष की आशंका, तेल संकट और वैश्विक भू-राजनीतिक प्रभाव पश्चिम एशिया में तनाव का स्वरूप एक बार फिर बदल रहा है। फरवरी 2026 में शुरू हुए हवाई हमलों के बाद अब स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि संघर्ष हवा से ज़मीन की ओर बढ़ने वाला है। अमेरिका ने ‘Operation Epic Fury’ के तहत ईरान की सैन्य क्षमताओं को लक्ष्य बनाते हुए अपनी रणनीति को तेज कर दिया है। अब जमीनी अभियान की तैयारी इस पूरे संकट को न केवल व्यापक बल्कि दीर्घकालिक बना रही है। यह अब मात्र अमेरिका-ईरान के बीच द्विपक्षीय टकराव नहीं है; यह क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संतुलन की एक निर्णायक परीक्षा है। सैन्य परिदृश्य: त्वरित जीत बनाम थकाऊ प्रतिरोध अमेरिका ने अपनी सैन्य तैनाती को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है। USS Tripoli जैसे उन्नत उभयचर हमले वाले युद्धपोत को क्षेत्र में तैनात किया गया है, जिसमें हजारों मरीन सैनिक और आधुनिक हमले की पूरी क्षमता मौजूद है। यह इंगित करता है कि संभावित जमीनी कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। इसमें विशेष बलों के ऑपरेशन, सामरिक ठिकानों पर कब्जा और रण...

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Supreme Court Verdict on OBC Creamy Layer: Union of India v. Rohith Nathan Explained

OBC क्रीमी लेयर पर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय: एक विस्तृत विश्लेषण भारत में सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति के इतिहास में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय एक मील का पत्थर माना जा सकता है। मामला 'यूनियन ऑफ इंडिया वर्सेस रोहित नाथन' (Union of India v. Rohith Nathan) से जुड़ा है, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के तहत लागू 'क्रीमी लेयर' (Creamy Layer) के सिद्धांतों को स्पष्ट किया और प्रशासनिक त्रुटियों पर विराम लगाया। यह विषय संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II (GS-II) के अंतर्गत आने वाले विषयों—भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय और शासन (Governance) के लिए। 1. मामले की पृष्ठभूमि और विवाद का मूल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिए जाने वाले 27% आरक्षण का लाभ उन व्यक्तियों को नहीं मिलता है जो 'क्रीमी लेयर' के अंतर्गत आते हैं। सरकार द्वारा क्रीमी लेयर की पहचान के लिए आय और पद/स्थिति (Status) से संबंधित विभिन्न मापदंड तय किए गए हैं। वर्तमान में आर्थिक सीमा ₹8 लाख प्रति वर्ष की आय तय क...

Gujarat Becomes Second Indian State to Pass UCC: Key Highlights of the 2026 Act

गुजरात एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026: UPSC CSE हेतु संपूर्ण विश्लेषण पाठ्यक्रम संबंध (Syllabus Mapping): GS Paper-2 (शासन व्यवस्था, भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय एवं तुलनात्मक राजनीति) 1. चर्चा में क्यों? (Context) हाल ही में गुजरात राज्य समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 को भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति (अनुच्छेद 201) प्राप्त हो गई है। उत्तराखंड के पश्चात् गुजरात देश का ऐसा दूसरा प्रमुख राज्य बन गया है, जिसने अपने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है।  यह कानून राज्य में विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने (Adoption) तथा लिव-इन संबंधों के लिए सभी धर्मों पर लागू होने वाला एक सर्वसमावेशी व एकीकृत कानूनी ढांचा प्रदान करता है। 2. संवैधानिक एवं कानूनी आधार (Constitutional & Legal Framework) समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ है— नागरिकों की धार्मिक या व्यक्तिगत (Personal) मान्यताओं से परे होकर संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र में विवाह, तलाक, संपत्ति व उत्तराधिकार संबंधी एक समान नागरिक कानून का होना। अनुच्छेद 44 (DPSP): संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नी...

India Election Controversy 2026: Opposition Raises Questions on Voter Lists

चुनावी विवाद, संस्थागत स्वायत्तता और लोकतांत्रिक विश्वास विषय (Syllabus Mapping):  UPSC CSE मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (GS Paper II): भारतीय संविधान, शासन व्यवस्था (Governance), लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका एवं चुनावी सुधार। 1. विषय का परिचय एवं हालिया संदर्भ (Context) भारत में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। 10-12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग और मतदाता सूची (Electoral Roll) से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विरोध मार्च आयोजित किया गया, जिसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी प्रशासन, मतदाता सूची की शुद्धता और संस्थागत स्वायत्तता जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। 2. विवाद का मुख्य कारण एवं प्रशासनिक प्रतिक्रिया (Core Issue & Administrative Action) विवाद का मूल कारण: विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Voter-Roll Revision) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही है। इससे पात्र...

UPSC Current Affairs in Hindi : 18 April 2025

दैनिक समसामयिकी: 18 अप्रैल 2025 1-भारतीय ज्ञान को वैश्विक मान्यता – भारतीय ग्रंथों की पुनर्प्रतिष्ठा का युग भारत की आत्मा उसकी सनातन सभ्यता में निहित है—एक ऐसी सभ्यता जो केवल भौतिक संरचनाओं से नहीं, बल्कि शाश्वत विचारों, ग्रंथों और सांस्कृतिक मूल्यों से परिपूर्ण है। हाल ही में UNESCO द्वारा श्रीमद्भगवद गीता और भरतमुनि के नाट्यशास्त्र को ‘Memory of the World Register’ में शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह निर्णय भारत के प्राचीन ज्ञान को वैश्विक स्वीकृति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। भारत की सांस्कृतिक पूंजी की वापसी औपनिवेशिक दृष्टिकोण ने लंबे समय तक भारतीय ग्रंथों को उपेक्षित किया या मिथकीय घोषित कर दिया। लेकिन आज वही ग्रंथ, जो सदियों से मानवता का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं, मानव सभ्यता की वैश्विक धरोहर के रूप में पुनः प्रतिष्ठित हो रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और बौद्धिक परंपरा की वापसी है। गीता: नैतिकता और मानसिक शांति का शाश्वत स्रोत श्रीमद्भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक दार्शनिक ग्रंथ है, जो कर्म , कर्तव्य , धर्म , और आत्मा जैसे...

Extradition of Tahawwur Rana – A Step Forward in India’s Fight Against Terrorism

 तहव्वुर हुसैन राणा का भारत प्रत्यर्पण: 26/11 मुंबई हमलों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम 10 अप्रैल, 2025 को, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं में से एक, पाकिस्तानी मूल के कनाडाई-अमेरिकी नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा को संयुक्त राज्य अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया। यह घटना 2008 में हुए उन भयावह आतंकी हमलों के 17 साल बाद हुई है, जिसमें 166 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। राणा का भारत आगमन एक लंबी कानूनी लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है, जो मुंबई हमले के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राणा की पृष्ठभूमि और भूमिका तहव्वुर हुसैन राणा एक पूर्व पाकिस्तानी सैन्य चिकित्सक था, जो बाद में कनाडा और अमेरिका में व्यवसायी बन गया। उसका नाम तब सुर्खियों में आया जब यह पता चला कि वह डेविड कोलमैन हेडली का करीबी सहयोगी था। हेडली, जो मूल रूप से अमेरिकी-पाकिस्तानी नागरिक था, ने मुंबई हमलों की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन हमलों को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) ने अंजाम दिया था। राणा पर आरोप है कि उ...

Global Forest Resources Assessment (GFRA) 2025: India’s Progress, Challenges, and Policy Insights

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (GFRA) 2025: भारत के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक लेख परिचय 22 अक्टूबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इंडोनेशिया के बाली में आयोजित “वैश्विक वन अवलोकन पहल (GFOI)” सम्मेलन के दौरान वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (Global Forest Resources Assessment - GFRA) 2025 जारी किया। यह FAO की एक प्रतिष्ठित और दीर्घकालिक पहल है, जो पिछले 80 वर्षों से वनों की स्थिति, विस्तार और स्वास्थ्य पर निगरानी रखती आ रही है। यह रिपोर्ट हर पाँच वर्ष में प्रकाशित होती है और इसमें 200 से अधिक देशों के उपग्रह चित्रण, राष्ट्रीय सर्वेक्षणों, और फील्ड डेटा का विश्लेषण शामिल होता है। GFRA 2025 का उद्देश्य वनों की पारिस्थितिक स्थिति, कार्बन भंडारण, जैव-विविधता, और मानव जीवन में उनके योगदान का मूल्यांकन करना है। यह रिपोर्ट न केवल वैश्विक पर्यावरणीय प्रवृत्तियों को रेखांकित करती है, बल्कि देशों के लिए सतत वन प्रबंधन की दिशा में नीति निर्धारण हेतु एक ठोस आधार भी प्रदान करती है। वैश्विक परिदृश्य GFRA 2025 के अनुसार, विश्व के वनों की स्थिति में सुधार और चुनौतियों दोनों ...

09 April 2025 Current Affairs in Hindi

 UPSC Current Affairs : April 2025 1-"नमामि गंगे" परियोजना की शुरुआत के एक दशक बाद इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करें। (Review the achievements and challenges of the Namami Gange Project a decade after its launch.) उत्तर का प्रारूप: परिचय: "नमामि गंगे" योजना वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाना है। यह भारत सरकार की एक फ्लैगशिप परियोजना है जो पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य निकायों के सहयोग से संचालित होती है। प्रमुख उपलब्धियाँ (Achievements): जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना: अब तक 195 से अधिक STPs (Sewage Treatment Plants) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई कार्यशील हैं। औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन: 1,100 से अधिक प्रदूषक उद्योगों की निगरानी की जा रही है और गंगा में अवैध अपशिष्ट छोड़े जाने की घटनाओं में गिरावट आई है। घाट विकास एवं सौंदर्यीकरण: हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर 150+ घाटों का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है। नदी सतह की सफाई: रिवर स्किमर मशीनों द्व...

DRDO and Indian Army Successfully Conduct Four MRSAM Missile Tests in Odisha

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम: DRDO व भारतीय सेना द्वारा MRSAM परीक्षण की सफलता हाल ही में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने ओडिशा के समुद्र तटीय क्षेत्र से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) के चार उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह न केवल देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ठोस प्रगति भी है। MRSAM प्रणाली की विशेषताएँ: MRSAM, जिसे बाराक-8 के नाम से भी जाना जाता है, भारत-इज़राइल संयुक्त परियोजना का हिस्सा है। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन, हेलीकॉप्टरों और क्रूज़ मिसाइलों को 70-100 किमी तक की दूरी पर नष्ट करने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता। 360 डिग्री कवरेज व हाई रेस्पॉन्स टाइम। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के अनुकूल डिजाइन। रणनीतिक महत्व: यह परीक्षण भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करता है। भविष्य में स्वदेशी हथियार प्रणालियों ...

Trump's 50% Tariff on India: Economic Impacts and Strategic Responses

ट्रम्प की टैरिफ नीति: भारत के लिए नया आर्थिक संकट या केवल परीक्षा की घड़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक व्यापार को नया मोड़ दे दिया है। भारत, जो अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता रहा है, अब 50 प्रतिशत टैरिफ की चपेट में फंस गया है। यह कदम न केवल द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध को 'ईंधन' दे रहा है, लेकिन यह दावा कई सवाल खड़े करता है—क्यों केवल भारत को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन जैसे अन्य बड़े आयातक बच गए हैं? यह टैरिफ युद्ध भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक कठिन परीक्षा है, जहां एक ओर निर्यात पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भरता की राहें खुल रही हैं। ट्रम्प का यह फैसला अप्रत्याशित नहीं है। अप्रैल 2025 में उन्होंने 'मुक्ति दिवस' घोषित कर वैश्विक आयात पर 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में देश-विशेष दरों में बदल दिया ग...

Bypassing Hormuz: India’s Strategic Deep-Sea Oil Pipeline to Secure Gulf Energy Imports

MEIDP Project: क्या है भारत-यूएई की डीप-सी पाइपलाइन योजना, जिससे खत्म होगी होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता? पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक योजना पर काम शुरू कर दिया है। भारत और यूएई (UAE) के बीच अरब सागर के नीचे गहरे समुद्र में एक सीधी तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी चल रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी के बीच हुई बैठक के बाद इस महा-परियोजना को केंद्र सरकार ने अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। पहले इसे एक निजी प्रोजेक्ट माना जा रहा था, लेकिन अब यह भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है। परियोजना का नाम और मुख्य विशेषताएं: MEIDP इस महत्वाकांक्षी परियोजना को MEIDP (Middle East to India Deep-Water Pipeline) नाम दिया गया है।   रूट: यह पाइपलाइन यूएई और ओमान के तटों से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए सीधे भारत में गुजरात और महाराष्ट्र ...