अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
यूरोपीय संघ का एकीकरण और चुनौतियाँ: एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण यूरोपीय संघ (ईयू) लंबे समय से क्षेत्रीय एकीकरण का प्रतीक रहा है। इसकी नींव यही विचार लेकर रखी गई थी कि सदस्य देशों के बीच सहयोग और साझा नीतियों के माध्यम से शांति और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके। आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर एकजुटता की यह परियोजना पिछले कई दशकों में कई उतार-चढ़ाव देख चुकी है। हाल के वर्षों में ईयू की एकता पर विशेष रूप से ब्रेक्सिट ने सवाल खड़े किए। 2020 में ब्रिटेन का संघ से बाहर निकलना यह साबित करता है कि सदस्य देशों की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ और घरेलू राजनीतिक दबाव यूरोपीय एकीकरण को चुनौती दे सकते हैं। इसके बावजूद, ईयू ने बाहरी खतरों, जैसे रूस की आक्रामकता और अमेरिका की यूरोपीय सुरक्षा में अनिश्चित रुचि, के जवाब में एकजुट होने की क्षमता दिखाई। ब्रेक्सिट और एकीकरण की चुनौतियाँ ब्रेक्सिट के बाद ईयू के सामने यह चुनौती थी कि कैसे एक बड़े सदस्य देश की अनुपस्थिति के बावजूद समन्वय बनाए रखा जाए। रूस का यूक्रेन पर 2022 का आक्रमण और अमेरिका की नाटो संबंधी अनिश्चितता ने यूरोपीय रक्षा और सुरक्षा नीतियो...