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तंज़ानिया में चुनावी हिंसा का बढ़ता संकट: लोकतंत्र की डगमगाती बुनियाद परिचय अफ्रीका के पूर्वी तट पर बसा तंज़ानिया, जो कभी स्थिरता और शांतिपूर्ण राजनीतिक संक्रमण का उदाहरण माना जाता था, अब चुनावी हिंसा के तूफ़ान में घिर चुका है। 29 अक्टूबर 2025 को हुए आम चुनाव — जिन्हें देश की लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रतीक कहा जा रहा था — महज़ कुछ घंटों में रक्तरंजित विरोध प्रदर्शनों, सैकड़ों मौतों और सरकारी दमन की छवियों में बदल गए। विपक्ष के अनुसार अब तक 700 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं , जबकि सरकार ने इस पर मौन साध रखा है। दार एस सलाम, अरुशा, डोडोमा और म्वांज़ा जैसे शहरों की सड़कों पर फैले आक्रोश ने यह सवाल फिर से जीवित कर दिया है — क्या अफ्रीका के इस प्रमुख राष्ट्र का लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक भ्रम है? ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: स्थिरता का भ्रम 1961 में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र होने के बाद तंज़ानिया ने अफ्रीकी महाद्वीप को स्थिर शासन का एक दुर्लभ उदाहरण दिया था। चामा चा मापिंदुज़ी (CCM) — जो स्वाहिली में “क्रांति की पार्टी” कहलाती है — ने छह दशकों से सत्ता पर क़ब्ज़ा बनाए रखा है। 1992 म...