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अमेरिका–ईरान सीजफायर 2026: अस्थायी विराम या कूटनीतिक पुनर्जागरण? अप्रैल 2026। पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध और शांति के बीच की उस धुंधली रेखा पर खड़ा है जहाँ हर कदम इतिहास रच सकता है या फिर पुरानी गलतियों को दोहरा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम (सीजफायर) पहली नज़र में राहत का संकेत है, लेकिन गहन विश्लेषण यह बताता है कि यह कोई स्थायी शांति नहीं, बल्कि दोनों महाशक्तियों की थकान, रणनीतिक गणना और भविष्य की वार्ता का एक अस्थायी पुल है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित यह विराम पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान के 10-बिंदु प्रस्ताव पर आधारित है। लेकिन क्या यह वास्तव में “शांति की शुरुआत” है या केवल “अगले दौर के संघर्ष का पूर्वाभास”? यह लेख इसी प्रश्न को समग्र रूप से समझने का प्रयास है। 1. युद्ध की जड़ें: शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय प्रभुत्व का टकराव 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क (हिजबुल्लाह, हूती, हमास) और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त रणनीति चरम पर पहुँच गई। ईरान ने इसे “अस्तित्...