अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
गाजा संघर्ष पर ट्रम्प की अपील: क्या यह मध्य पूर्व में शांति की नई शुरुआत है? प्रस्तावना: संघर्ष की थकान और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी गाजा की गलियों में मलबे के ढेर, हजारों निर्दोष मौतें और निराशा—यह सिर्फ एक मानवीय त्रासदी नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय तंत्र की विफलता की निशानी भी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में डोनाल्ड ट्रम्प का यह कहना कि “अब रक्तपात बंद हो” केवल एक भावुक अपील नहीं, बल्कि मध्य पूर्व की कूटनीतिक दिशा बदलने की कोशिश भी है। पृष्ठभूमि: गाजा में 20 माह का युद्ध और वैश्विक असर इजरायल और हमास के बीच यह संघर्ष दो साल से अधिक चला आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 40,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह युद्ध अब केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, शरणार्थी संकट और कट्टरपंथी संगठनों के पुनर्जीवन जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को भी जन्म दे रहा है। ट्रम्प का नया अवतार: कूटनीति और समावेशिता का संदेश 2016–20 के कार्यकाल में ट्रम्प के नेतृत्व में ‘अब्राहम समझौते’ जैसे ऐतिहासिक कदम हुए थे, जिनसे इजरायल और अरब देशों के बीच संबंध सामान्य ह...