हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
Bharat ki Videsh Neeti mein Dvidaliya Sahmati ka Hraas: Putin ki 2025 Yatra aur Ubharti Rajnitik Darar
भारतीय विदेश नीति में द्विदलीय सहमति का क्षरण: पुतिन की 2025 भारत यात्रा के संदर्भ में एक समग्र विश्लेषण (नीरजा चौधरी के विश्लेषण पर आधारित मौलिक व शैक्षिक टिप्पणी) स्वतंत्रता के बाद से भारत की विदेश नीति एक महत्वपूर्ण विशेषता के लिए जानी जाती रही है—द्विदलीय (bipartisan) सहमति। चाहे नेहरू का गुटनिरपेक्षता का युग हो, इंदिरा गांधी की महाशक्तियों के बीच संतुलन की रणनीति, राजीव गांधी का आधुनिकीकरण-उन्मुख दृष्टिकोण हो या मनमोहन सिंह का वैश्विक एकीकरण—विदेश नीति सामान्यतः दलगत राजनीति से ऊपर रखी गई। इस निरंतरता ने न केवल भारत की वैश्विक छवि को स्थिरता दी, बल्कि यह भी संदेश दिया कि विश्व के किसी भी साझेदार के साथ भारत का संबंध “राष्ट्रहित” से संचालित होता है, न कि घरेलू राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से। लेकिन दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने इस परंपरा में एक अप्रत्याशित विचलन उत्पन्न किया। यह दौरा अपने भू-राजनीतिक और रणनीतिक आयामों की वजह से अत्यधिक विशेष था— यूक्रेन युद्ध चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, रूस पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण वैश्विक आर्थिक तंत्र से आ...