अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
दक्षिण अफ़्रीका G20 शिखर सम्मेलन, अमेरिका की अनुपस्थिति और जलवायु घोषणापत्र: एक व्यापक विश्लेषण दक्षिण अफ़्रीका में 22-23 नवंबर 2025 को संपन्न G20 नेताओं का शिखर सम्मेलन वैश्विक जलवायु शासन और बहुपक्षीय सहयोग में एक निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। इस सम्मेलन में पारित जलवायु घोषणापत्र न केवल अपने महत्वाकांक्षी प्रावधानों के कारण ऐतिहासिक है, बल्कि इसलिए भी कि इसे संयुक्त राज्य अमेरिका की भागीदारी, समर्थन या सहमति के बिना अपनाया गया। अमेरिकी प्रशासन ने इस कदम को “शर्मनाक” कहकर खारिज किया, जबकि दक्षिण अफ़्रीका ने स्पष्ट कर दिया कि घोषणापत्र की भाषा पर किसी प्रकार की पुनर्विचार प्रक्रिया संभव नहीं है। यह स्थिति ट्रम्प प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका की जलवायु कूटनीति से पीछे हटने की प्रवृत्ति को उजागर करती है और यह भी संकेत देती है कि वैश्विक शक्ति-संतुलन अब नए भू-राजनीतिक ढांचे की ओर बढ़ रहा है। 1. घोषणापत्र की प्रमुख विशेषताएँ दक्षिण अफ़्रीका G20 घोषणापत्र को जलवायु कार्रवाई की दृष्टि से अभूतपूर्व माना जा रहा है। इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं: • जलवायु संकट को अस्तित्वगत खतरा घोषित करना...