हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
पेटल गहलोत: संयुक्त राष्ट्र में भारत की नई कूटनीतिक ताकत का उदय संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा है, जहां राष्ट्र अपनी नीतियों और दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखते हैं। सितंबर 2025 में, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कश्मीर और भारत पर पुराने आरोप दोहराए, तो भारत की ओर से जवाब देने आईं पेटल गहलोत — एक युवा, तेजतर्रार और आत्मविश्वास से भरी राजनयिक। उनका तथ्य-आधारित, आक्रामक और तर्कपूर्ण भाषण न केवल पाकिस्तान के दावों को ध्वस्त करता है, बल्कि भारत की बदलती कूटनीतिक धार का प्रतीक बन गया। यह संपादकीय भारत की इस नई कूटनीतिक शक्ति और इसके वैश्विक प्रभाव की पड़ताल करता है। पेटल गहलोत: भारतीय कूटनीति का उभरता चेहरा पेटल गहलोत, भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी, नई पीढ़ी की कूटनीति का प्रतीक हैं। दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेजों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से शिक्षा प्राप्त पेटल ने 2020 में विदेश मंत्रालय में कदम रखा और 2023 में संयुक्त राष्ट्र मिशन से जुड़ीं। उनकी यह यात्रा भारत की उस ...