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यमन संकट का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: सऊदी–यूएई मतभेद और बदलता क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रस्तावना यमन का संघर्ष केवल समकालीन सत्ता-संघर्ष की कहानी नहीं है; यह औपनिवेशिक विरासत, जनजातीय राजनीति, वैचारिक ध्रुवीकरण, क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता और भू-राजनीतिक हस्तक्षेपों से उपजा एक दीर्घकालिक ऐतिहासिक संकट है। दिसंबर 2025 में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच उत्पन्न हालिया तनाव—जिसमें सऊदी-नीत गठबंधन ने मुकल्ला बंदरगाह पर यूएई से जुड़े हथियारों की शिपमेंट को लक्ष्य बनाकर हवाई हमला किया, और उसके बाद यूएई ने अपनी सेना की वापसी की घोषणा की—इस जटिल इतिहास की अगली कड़ी है। इस घटना ने यमन और खाड़ी क्षेत्र की राजनीति को नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां पूर्व सहयोगी अब प्रतिस्पर्धी बन चुके हैं। इस निबंध का उद्देश्य है—यमन संकट की ऐतिहासिक जड़ों, आंतरिक सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना, क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका और हालिया घटनाओं के व्यापक निहितार्थों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करना। हम ऐतिहासिक तथ्यों, हाल की घटनाओं और सांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर इस संकट को अधिक स्पष्ट रूप से समझेंगे, जिसमें क्...