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India Joins Trump’s Gaza Peace Board as Observer: Strategic Balance in Middle East Diplomacy 2026

भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प  द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...

India–Brazil Strategic Partnership 2026: Strengthening Global South, Trade Diversification and Critical Minerals Cooperation

भारत-ब्राजील साझेदारी: ग्लोबल साउथ में नई ऊर्जा का संचार वैश्विक व्यवस्था एक निर्णायक संक्रमण के दौर से गुजर रही है। शीत युद्ध के बाद स्थापित एकध्रुवीय ढांचा अब बहुध्रुवीय शक्ति-संतुलन की ओर बढ़ रहा है, जहाँ उभरती अर्थव्यवस्थाएँ अपनी सामूहिक आवाज को संगठित कर रही हैं। इसी संदर्भ में 21 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री Narendra Modi और ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक केवल द्विपक्षीय कूटनीति की घटना नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की उभरती चेतना का प्रतीक है। यह साझेदारी व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, जलवायु और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के माध्यम से एक नई रणनीतिक दिशा निर्धारित कर रही है। दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया है—जो वर्तमान स्तर से एक उल्लेखनीय वृद्धि है। ऐतिहासिक संदर्भ: दो लोकतंत्र, साझा दृष्टि भारत और ब्राजील भौगोलिक रूप से भिन्न महाद्वीपों में स्थित होने के बावजूद कई समानताओं से जुड़े हैं—दोनों विशाल जनसंख्या वाले लोकतंत्र हैं, कृषि और संसाधन-सम...

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India–France Strategic Partnership in a Multipolar World: How It Is Redefining India’s Global Power Status

बहुध्रुवीय विश्व में भारत–फ्रांस का उभार भारत की पुनर्परिभाषित वैश्विक रणनीतिक स्थिति (UPSC-उन्मुख विश्लेषणात्मक लेख) भूमिका: बदलती वैश्विक व्यवस्था और भारत की उभरती भूमिका 21वीं सदी का अंतरराष्ट्रीय तंत्र तीव्र गति से बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है, जहाँ एकध्रुवीय वर्चस्व के स्थान पर बहुपक्षीय संतुलन, लचीली साझेदारियाँ और मुद्दा-आधारित सहयोग निर्णायक बनते जा रहे हैं। यूक्रेन संकट, ग़ाज़ा युद्ध, ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का पुनर्गठन इस तथ्य को रेखांकित करते हैं कि न तो कठोर सैन्य गठबंधन टिकाऊ हैं और न ही किसी एक शक्ति का दीर्घकालिक प्रभुत्व। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत–फ्रांस संबंध केवल एक द्विपक्षीय साझेदारी नहीं रह गए हैं, बल्कि भारत की वैश्विक रणनीतिक पहचान को नया आयाम देने वाली धुरी के रूप में उभरे हैं। फरवरी 2026 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति की मुंबई यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री के साथ हुए व्यापक समझौतों ने इस रिश्ते को “Special Global Strategic Partnership” के स्तर तक उन्नत किया। यह उन्नयन भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का प्रतीक है—जहाँ राष...

AI Impact Summit 2026: How India Is Shaping the Future of Global AI Leadership from the Global South

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: महत्वाकांक्षा, नेतृत्व और चुनौतियों का संगम परिचय इक्कीसवीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रमुख चालक बन चुकी है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत ने AI को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीति के केंद्र में रखा है। इसी संदर्भ में 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत की दीर्घकालिक AI दृष्टि का सार्वजनिक घोषणापत्र बनकर उभरी। समिट का उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री मोदीजी ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की AI नीति “लाभ-केंद्रित” नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित, समावेशी और उत्तरदायी होगी। 20 फरवरी तक चलने वाली यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलन है—जो अपने आप में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत देता है। समिट की परिकल्पना: People, Planet, Progress इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की वैचारिक धुरी तीन स्तंभों पर टिकी है— People (लोग), Planet (पर्या...

Pariksha Pe Charcha 2026: PM Modi’s Motivational Message for Students on Exams, Skills, Balance & Success

परीक्षा पे चर्चा 2026: परीक्षा से आगे जीवन की तैयारी का राष्ट्रीय संवाद परीक्षा का समय आते ही देश के करोड़ों छात्रों के मन में एक ही सवाल गूंजने लगता है— क्या मैं सफल हो पाऊँगा? इसी प्रश्न, इसी तनाव और इसी अनिश्चितता को संवाद और आत्मविश्वास में बदलने का मंच है ‘परीक्षा पे चर्चा’ । 6 फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधी बातचीत की। सुबह 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में दिल्ली, गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूरदर्शन, पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया। इस बार 4.5 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन होना यह दर्शाता है कि आज का छात्र केवल परीक्षा टिप्स नहीं, बल्कि जीवन मार्गदर्शन चाहता है। 🌱 सपने देखें, लेकिन एक्शन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संदेश बेहद स्पष्ट और प्रेरक था— “सपने न देखना जुर्म है, लेकिन सिर्फ सपनों की गुनगुनाहट से काम नहीं चलता।” उन्हों...

Reforming Global Governance: Strategic Significance of the G4 Countries’ Munich Meeting 2026

बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार: G4 देशों की म्यूनिख बैठक का ऐतिहासिक महत्व भूमिका: बदलती विश्व-व्यवस्था और सुधार की अनिवार्यता 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति गहन संक्रमण के दौर से गुजर रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित बहुपक्षीय संस्थाएं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र—आज यूक्रेन युद्ध, गाज़ा–मध्य पूर्व संकट, इंडो-पैसिफिक तनाव, जलवायु आपातकाल, महामारी, और साइबर–स्पेस की चुनौतियों से जूझ रही हैं। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि 1945 की संस्थागत संरचनाएँ 2026 की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं रहीं। इसी पृष्ठभूमि में G4 देशों—भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील —द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), में सुधार की मांग को नया बल मिला है। फरवरी 2026 में के दौरान आयोजित G4 विदेश मंत्रियों की बैठक इस दिशा में एक निर्णायक प्रतीक बनकर उभरी। G4 का उदय: प्रतिनिधित्व की कमी के विरुद्ध सामूहिक आवाज G4 समूह का औपचारिक उभार 2005 में हुआ, जब इन चार देशों ने UNSC सुधार के लिए संयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया। आज ये देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और शासन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं— ...

Trump Administration Prepares Expanded Military Strike on Iran: Geopolitical Risks and Global Impact 2026

ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान पर संभावित विस्तारित सैन्य हमले की तैयारी: एक गहन भू-राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तावना: युद्ध और कूटनीति के बीच खड़ा मध्य पूर्व फरवरी 2026 में मध्य पूर्व की सामरिक हलचल ने वैश्विक राजनीति को एक बार फिर अस्थिरता की दहलीज पर ला खड़ा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान ने क्षेत्र में अभूतपूर्व सैन्य जमावड़ा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के विरुद्ध संभावित “विस्तारित सैन्य अभियान” की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। यह स्थिति केवल दो देशों के बीच शक्ति-प्रदर्शन नहीं है; यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता की परीक्षा है। प्रश्न केवल यह नहीं है कि हमला होगा या नहीं—बल्कि यह है कि यदि हुआ, तो उसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: अविश्वास की लंबी विरासत अमेरिका–ईरान संबंध 1979 की इस्लामी क्रांति से ही तनावपूर्ण रहे हैं। 2015 में हुआ परमाणु समझौता (JCPOA) इस तनाव को कम करने का एक प्रयास था। किंतु 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और “अधिकतम दबाव” नीति लागू करने क...

India–US Pax Silica Declaration 2026: AI, Semiconductor Security and Global Tech Resilience Explained

India–US Pax Silica Declaration: एआई-आधारित आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी लचीलापन की नई दिशा प्रस्तावना 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति अब केवल सैन्य शक्ति या पारंपरिक कूटनीति तक सीमित नहीं रही है; यह तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, डेटा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं पर आधारित नई भू-राजनीति में रूपांतरित हो चुकी है। ऐसे समय में 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित Global AI Impact Summit के दौरान भारत और अमेरिका के बीच संपन्न Pax Silica Declaration एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरी है। “Pax Silica” — जिसका आशय है ‘सिलिकॉन के माध्यम से शांति’ — केवल एक तकनीकी साझेदारी नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, विश्वसनीय एआई प्रणाली और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन की व्यापक रणनीति है। यह घोषणा इस विचार पर आधारित है कि भविष्य की समृद्धि और सुरक्षा, भरोसेमंद तकनीकी साझेदारियों और विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर करेगी। Pax Silica की पृष्ठभूमि और उद्देश्य 1. उत्पत्ति और रणनीतिक संदर्भ Pax Silica की अवधारणा अमेरिकी विदेश विभाग की उन पहलों से विकसित हुई है जिनका लक्...

National Interest Over Permanent Friends or Foes: India’s Shifting Strategic Compass

राष्ट्रीय हित ही सर्वोपरि: भारत की बदलती कूटनीतिक दिशा प्रस्तावना : : न मित्र स्थायी, न शत्रु अंतरराष्ट्रीय राजनीति का यथार्थवादी दृष्टिकोण बार-बार यह स्पष्ट करता है कि विश्व राजनीति में न कोई स्थायी मित्र होता है और न ही कोई स्थायी शत्रु। यदि कुछ स्थायी है, तो वह है प्रत्येक राष्ट्र का राष्ट्रीय हित (National Interest) । बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यही राष्ट्रीय हित कूटनीतिक रुख, विदेश नीति के निर्णय और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को निर्धारित करता है। वर्तमान समय में भारत की विदेश नीति इसी सिद्धांत का मूर्त रूप प्रतीत हो रही है। जहाँ एक ओर भारत और अमेरिका के बीच कुछ असहजता और मतभेद देखने को मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत और चीन, सीमा विवाद और गहरी अविश्वास की खाई के बावजूद संवाद और संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ते नज़र आ रहे हैं। यह परिदृश्य एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि भावनात्मक स्तर पर मित्रता या शत्रुता से परे जाकर, अंतरराष्ट्रीय राजनीति का आधार केवल और केवल हित-आधारित यथार्थवाद है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भारत के विदेश नीति इतिहास में यह कथन अनेक बार सत्य सिद्ध हुआ ...

Trump–US Supreme Court Clash 2026: Tariff Ruling, Constitutional Crisis and Global Economic Impact

ट्रंप–सुप्रीम कोर्ट टकराव: टैरिफ फैसले के मौलिक प्रभाव और वैश्विक असर 20 फरवरी 2026 को Supreme Court of the United States ने 6–3 के बहुमत से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया। यह केवल एक आर्थिक नीति पर न्यायिक टिप्पणी नहीं थी; यह अमेरिकी संवैधानिक ढांचे, शक्तियों के संतुलन, वैश्विक व्यापार व्यवस्था और समकालीन पॉपुलिस्ट राजनीति के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालने वाला निर्णय है। फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 122 के तहत 10% “ग्लोबल टैरिफ” लागू करने की घोषणा कर दी—जिससे स्पष्ट हो गया कि यह संघर्ष समाप्त नहीं हुआ, बल्कि एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। नीचे इस पूरे घटनाक्रम के मौलिक प्रभावों का बहुआयामी विश्लेषण प्रस्तुत है। 1. संवैधानिक संतुलन की पुनर्परिभाषा: कार्यपालिका बनाम न्यायपालिका अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैक्स और टैरिफ लगाने की स्पष्ट शक्ति देता है। IEEPA (1977) का उद्देश्य राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में सीमित आर्...

Bangladesh BNP Historic Victory 2026: Impact on India-Bangladesh Relations

बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत और भारत-बांग्लादेश संबंध: एक विस्तृत अकादमिक विश्लेषण प्रस्तावना 13 फरवरी 2026 को बांग्लादेश की राजनीति में एक निर्णायक परिवर्तन सामने आया, जब Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने संसदीय चुनाव में दो-तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त कर सत्ता में वापसी की। लगभग दो दशकों बाद यह परिवर्तन केवल सरकार बदलने की घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा, वैचारिक संतुलन और विदेश नीति की प्राथमिकताओं में संभावित पुनर्संरचना का संकेत है। संभावित प्रधानमंत्री के रूप में Tarique Rahman का उभार इस परिवर्तन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हुआ, जिसने Sheikh Hasina के नेतृत्व वाली Awami League सरकार का अंत किया। इस राजनीतिक संक्रमण ने दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है—विशेषकर भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सहयोग और तनाव के आयाम भारत और बांग्लादेश के संबंध 1971 के मुक्ति संग्राम से गहराई से जुड़े हैं। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक वर्षों में संबंध सहयोगपूर्ण रहे, क...

Israel’s West Bank Land Registration Revival: De Facto Annexation, Legal Impact and Geopolitical Consequences

इज़राइल की वेस्ट बैंक में भूमि पंजीकरण प्रक्रिया की बहाली: एक de facto विलय की दिशा में कदम परिचय 15 फरवरी 2026 को इज़राइल की कैबिनेट ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भूमि पंजीकरण (land registration) की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी, जो 1967 के बाद पहली बार हो रहा है। यह फैसला वेस्ट बैंक (जिसे इज़राइल में जूडिया और समरिया कहा जाता है) पर इज़राइल के नियंत्रण को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इज़राइली सरकार इसे प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता का मुद्दा बताती है, जबकि फिलिस्तीनी पक्ष, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और कई देश इसे "de facto annexation" (वास्तविक विलय) की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। यह लेख इस फैसले के ऐतिहासिक, कानूनी, राजनीतिक और भू-राजनीतिक संदर्भों का अकादमिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वेस्ट बैंक पर 1967 के छह-दिवसीय युद्ध में इज़राइल ने कब्जा किया था, जब यह क्षेत्र जॉर्डन के नियंत्रण में था। 1948-1967 तक जॉर्डन ने यहां भूमि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चलाई थी, लेकिन केवल लगभग एक-तिहाई भूमि ही औपचारिक रूप से पंजी...