भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
भारत की स्वदेशी रक्षा शक्ति में ऐतिहासिक छलांग: MPATGM मिसाइल का सफल परीक्षण 11 जनवरी 2026 भारतीय रक्षा इतिहास के लिए एक यादगार दिन बन गया, जब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित KK रेंज में तीसरी पीढ़ी की मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल फ्लाइट परीक्षण किया। यह परीक्षण एक चलते हुए टैंक-नुमा लक्ष्य पर “टॉप-अटैक” मोड में किया गया, जिसने इस मिसाइल की आधुनिक युद्धक्षेत्र के अनुरूप क्षमता को प्रमाणित कर दिया। यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की रक्षा यात्रा में एक मजबूत कदम है, जो भारत को उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाता है। परीक्षण का परिदृश्य और वैज्ञानिक उपलब्धि इस परीक्षण का नेतृत्व DRDO की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), हैदराबाद ने किया। लक्ष्य के रूप में डिफेंस लेबोरेटरी, जोधपुर द्वारा विकसित एक थर्मल टारगेट सिस्टम का उपयोग किया गया, जो वास्तविक टैंक की तरह गर्मी उत्सर्जन करता है और गति में भी रहता है। मिसाइल ने लक्ष्य को पहचान कर स्वत...