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Pope Leo XIV’s Lebanon Visit: A New Era of Peace, Interfaith Dialogue, and Middle East Religious Diplomacy
पोप लियो XIV का लेबनान दौरा: मध्य पूर्व में धार्मिक कूटनीति का पुनरुत्थान सारांश यह लेख 30 नवंबर से 2 दिसंबर 2025 के बीच संपन्न पोप लियो XIV के लेबनान दौरे का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जो आधुनिक धार्मिक कूटनीति के परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है। मध्य पूर्व के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकटों के बीच, पोप की यह यात्रा न केवल लेबनान के लिए एक नैतिक समर्थन थी, बल्कि वैश्विक शांति, धार्मिक संवाद और मानवीय मूल्यों के संरक्षण की दिशा में एक व्यापक संदेश भी थी। लेख में इस यात्रा का ऐतिहासिक संदर्भ, राजनीतिक-धार्मिक आयाम, सांकेतिक यात्रा-स्थल, तथा इसके परिणामों का विश्लेषण किया गया है। 1. प्रस्तावना धार्मिक नेतृत्व इतिहास में अनेक बार वैश्विक संघर्षों के मध्य शांति के स्वर के रूप में उभरा है। 2025 में कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च पद पर निर्वाचित पहले अमेरिकी मूल के पोप, लियो XIV, इसी परंपरा के वाहक प्रतीत होते हैं। अपनी पोंटिफिकेट की प्रारंभिक अवस्था में ही तुर्की और लेबनान जैसे संवेदनशील देशों का चयन करना इस बात का संकेत था कि उनका नेतृत्व केवल धार्मिक सीमाओं तक सीमित...