अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
🌍 विदेशी सहायता का निलंबन और वैश्विक स्वास्थ्य संकट : राजनीति बनाम मानवता मानव सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि उसने विज्ञान और चिकित्सा के सहारे लाखों-करोड़ों लोगों का जीवन बचाने की क्षमता हासिल की है। टीकों की खोज, दवाओं का विकास और स्वास्थ्य अभियानों ने विश्वभर में मृत्यु-दर घटाने और जीवन-आशा बढ़ाने में क्रांतिकारी योगदान दिया है। किंतु जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सामरिक हितों के कारण स्वास्थ्य जैसे सार्वभौमिक अधिकार पर आघात होता है, तो इसके परिणाम केवल नीतिगत असफलता नहीं बल्कि मानवीय त्रासदी के रूप में सामने आते हैं। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा विदेशी सहायता निलंबन का निर्णय इसी दिशा में एक गहरी चिंता उत्पन्न करने वाला उदाहरण है। ट्रम्प प्रशासन ने अपनी America First नीति के तहत स्वास्थ्य सहायता को भी विदेशी खर्च मानकर कम कर दिया। इसका सीधा असर USAID और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर पड़ा, जिनके माध्यम से HIV और मलेरिया रोधी दवाएँ दुनिया के कई गरीब देशों तक पहुँचाई जाती थीं। अब ये दवाएँ समय पर नहीं पहुँच पा रहीं और कई खेप तो बीच रास्ते ही रोक दी गई ...