अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारतीय रिज़र्व बैंक का नया मौद्रिक मोड़: रेपो दर 5.25% — विकास की बदलती लय का संकेत — एक अवधारणात्मक व UPSC उन्मुख विश्लेषण प्रस्तावना: जब अर्थव्यवस्था संतुलन की दुर्लभ अवस्था में हो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 25 आधार अंकों की कटौती कर 5.25% पर ला दिया। पहली नज़र में यह केवल एक तकनीकी परिवर्तन लगता है, पर वास्तव में यह भारत की आर्थिक दिशा में एक गहरे बदलाव का संकेत है। मुद्रास्फीति दो दशक के निम्न स्तरों के करीब है, आर्थिक विकास 7% से ऊपर टिके रहने के संकेत दे रहा है, और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। RBI गवर्नर संजय मालवीय ने इसे भारत का “गोल्डीलॉक्स क्षण” कहा—एक ऐसा समय जहाँ अर्थव्यवस्था तेज़ चल रही है, और तापमान यानी महँगाई नियंत्रित है। UPSC के नज़रिए से यह वह क्षण है जब मौद्रिक नीति केवल प्रतिक्रियात्मक न रहकर रणनीतिक हो जाती है। 1. निर्णय की पृष्ठभूमि: संख्याएँ जो कहानी कहती हैं मुद्रास्फीति का 0.25% तक गिर जाना केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि यह बताता है कि खाद्य आपूर्ति बेहतर रही, वैश्विक तेल की...