हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
बांग्लादेश चुनाव 2026: जेन-जेड विद्रोह से लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन तक भूमिका 12 फरवरी 2026 को संपन्न बांग्लादेश का 13वाँ संसदीय आम चुनाव केवल एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह दक्षिण एशिया के राजनीतिक इतिहास में एक युवा-प्रेरित सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बन गया। 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जन-उभार के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग के राजनीतिक प्रभुत्व का औपचारिक अंत कर दिया। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार की देखरेख में हुए इस चुनाव ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को स्पष्ट जनादेश प्रदान किया और देश की राजनीति को एक नए युग में प्रवेश कराया। पृष्ठभूमि: 2024 का जन-उभार और सत्ता का पतन 2024 में बांग्लादेश ने अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल देखी। विश्वविद्यालयों और शहरी केंद्रों से शुरू हुआ जेन-जेड (युवा पीढ़ी) का आंदोलन धीरे-धीरे एक व्यापक राष्ट्रीय विद्रोह में बदल गया। इस आंदोलन की मुख्य मांगें थीं— चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सत्तावादी शासन का अंत भ्रष्टाचार औ...