धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट के फैसले, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और सामाजिक प्रभावों का गहन विश्लेषण धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय केवल एक धार्मिक स्थल से जुड़ा कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक चेतना, न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन की गंभीर परीक्षा भी है। सदियों से विवादों, दावों और भावनात्मक बहसों के केंद्र में रही भोजशाला अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां न्यायपालिका ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस फैसले ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम समाधान का मार्ग अदालतों और संविधान से होकर ही गुजरता है। भोजशाला का इतिहास केवल एक इमारत का इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान, शिक्षा और आस्था का गहरा समन्वय दिखाई देता है। माना जाता है कि परमार वंश के महान राजा भोज के काल में यह स्थान विद्या और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था। समय के साथ राजनीतिक और ऐतिहासिक परिवर्तनों ने इसकी पहचान को विवादों में बदल...
भारत माता की प्रथम छवि वाली स्मारक मुद्रा और डाक टिकट का विमोचन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह 1 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक क्षण तब देखा गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह के अवसर पर एक विशेष डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। यह सिक्का भारतीय मुद्रा पर भारत माता की प्रथम छवि को दर्शाने वाला पहला अवसर है, जो इसे न केवल सांस्कृतिक, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बनाता है। स्मारक सिक्के की विशेषताएं 100 रुपये के इस स्मारक सिक्के का एक पक्ष राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) को प्रदर्शित करता है, जो भारत की संप्रभुता और गौरव का प्रतीक है। दूसरी ओर, भारत माता की भव्य छवि वरद मुद्रा में अंकित है, जिसमें वह करुणा और आशीर्वाद की मुद्रा में दर्शाई गई हैं। उनके समक्ष एक शेर, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है, और स्वयंसेवक उनके प्रति भक्ति और समर्पण की भावना के साथ नतमस्तक दिखाए गए हैं। यह चित्रण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मूल्यों—राष्ट्रभक्ति, सेवा, और समर्पण—को सुंदर ढंग से उजागर करता है। ...