हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
सोशल मीडिया की न्यूनतम आयु सीमा: भारत के लिए एक संतुलित राष्ट्रीय नीति की अनिवार्यता डिजिटल भारत की परिकल्पना ने देश को अभूतपूर्व रूप से जोड़ा है। आज भारत न केवल दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, बल्कि एक ऐसा समाज भी बन चुका है जहां एक अरब से अधिक लोग इंटरनेट से जुड़े हैं। यह उपलब्धि तकनीकी प्रगति और आर्थिक अवसरों का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ एक गंभीर सामाजिक प्रश्न भी उभर कर आया है—क्या भारत ने अपने बच्चों और किशोरों को डिजिटल दुनिया के जोखिमों से बचाने के लिए पर्याप्त नीतिगत तैयारी की है? विशेष रूप से, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच की न्यूनतम आयु को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नीति का अभाव अब एक नीतिगत शून्य के रूप में सामने है। वर्तमान में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए पंजीकरण पर रोक लगाते हैं। यह व्यवस्था मुख्यतः अमेरिका के COPPA कानून और वैश्विक मानकों से प्रेरित है। किंतु भारत में इस आयु सीमा को लागू कराने के लिए कोई सशक्त और बाध्यकारी राष्ट्रीय कानून नहीं है। परिणामस्वरूप, आयु सत...