अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत का "रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट मिशन": स्वदेशीकरण, रणनीतिक स्वायत्तता और हरित प्रौद्योगिकी की दिशा में परिवर्तनकारी कदम भारत ने 27 नवंबर 2025 को 7,280 करोड़ रुपये की लागत वाली जिस “रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट मिशन” को मंजूरी दी है, वह न केवल औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है, बल्कि वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय भी है। यह मिशन भविष्य की उन सभी प्रौद्योगिकियों का आधार है, जिन पर 21वीं सदी की ऊर्जा व्यवस्था, डिजिटल अवसंरचना और रक्षा क्षमता निर्भर करती है। दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों का बढ़ता महत्व नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) और सैमेरियम-कोबाल्ट (SmCo) जैसे उच्च-प्रदर्शन स्थायी चुंबक आधुनिक तकनीकी जगत की अनिवार्य इकाइयाँ हैं। इनका उपयोग अनेक अत्याधुनिक क्षेत्रों में होता है, जैसे— विद्युत वाहनों (EVs) के ट्रैक्शन मोटर्स में पवन ऊर्जा के डायरेक्ट-ड्राइव टरबाइनों में रक्षा प्रणालियों —मिसाइल गाइडेंस, रडार, सोनार और एयरोस्पेस में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स —स्मार्टफोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क ड्राइव मेडिकल उपकर...