अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
एशिया के शीर्ष 100 संस्थानों में भारत का परचम: उच्च शिक्षा की नई उड़ान परिचय भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली ने एक बार फिर एशियाई परिदृश्य पर अपनी छाप छोड़ी है। क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 के अनुसार, भारत के सात संस्थान— पाँच IITs, IISc बेंगलुरु और दिल्ली विश्वविद्यालय —एशिया के शीर्ष 100 संस्थानों में शामिल हुए हैं। यह उपलब्धि न केवल भारत की शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश की उच्च शिक्षा अब विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ी है। क्यूएस रैंकिंग का महत्व और मूल्यांकन प्रक्रिया क्यूएस (Quacquarelli Symonds) रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण पैमाना मानी जाती है। इस रैंकिंग में विश्वविद्यालयों और संस्थानों का मूल्यांकन नौ प्रमुख मानदंडों पर किया जाता है— शैक्षणिक प्रतिष्ठा (Academic Reputation) नियोक्ता प्रतिष्ठा (Employer Reputation) संकाय-छात्र अनुपात (Faculty-Student Ratio) शोध पत्रों की संख्या और गुणवत्ता (Citations per Paper) अंतरराष्ट्रीय संकाय और छात्र उपस्थिति (Internationaliz...