हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
मोदी–मैक्रों की मजबूत जोड़ी और भारत–फ्रांस रिश्तों का गहराता रणनीतिक अर्थ वैश्विक कूटनीति के तेजी से बदलते परिदृश्य में भारत अब महज एक प्रतिक्रियावादी शक्ति नहीं रह गया है। वह सक्रिय रूप से एजेंडा तय करने वाली शक्ति (agenda-setter) के रूप में उभर रहा है। 21वीं सदी के तीसरे दशक में भारत की विदेश नीति का मूल मंत्र स्पष्ट है— बहु-संरेखण (Multi-Alignment) के साथ रणनीतिक स्वायत्तता । अमेरिका, रूस, जापान, यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंधों के बीच फ्रांस एक ऐसे साझेदार के रूप में सामने आया है, जो न तो भारत पर दबाव डालता है और न ही उसे किसी रणनीतिक निर्भरता में बाँधता है। यह साझेदारी पारंपरिक सैन्य गठबंधनों से अलग, व्यावहारिक, विश्वास-आधारित और भविष्योन्मुखी है। फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ने इस रिश्ते को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया। मुंबई में प्रधानमंत्री और मैक्रों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत–फ्रांस संबंधों को औपचारिक रूप से “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (Special Global Strategic Partnership)” में अपग्रेड किया गया। इसी क्रम में ...