अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
ट्रंप की टैरिफ नीति और वैश्विक शक्ति संतुलन: “चीन को और महान बनाने” का अनचाहा परिणाम वर्ष 2025 की शुरुआत में यूरोपीय महाद्वीप की नजरों में रूस सबसे बड़ा खतरा नजर आ रहा था। यूक्रेन में जारी युद्ध, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और सुरक्षा संबंधी अस्थिरता ने पूरे क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में जकड़ रखा था। लेकिन जैसे-जैसे वर्ष आगे बढ़ा, खतरे की यह धारणा धीरे-धीरे बदलने लगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियां, खासकर अपने पारंपरिक सहयोगी देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ, यूरोप और वैश्विक व्यवस्था के लिए कहीं अधिक गंभीर चुनौती के रूप में उभरीं। इन नीतियों का घोषित उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करना, घरेलू रोजगार को बढ़ावा देना और व्यापार घाटे को कम करना था। लेकिन इनका एक अनचाहा और विडंबनापूर्ण परिणाम सामने आया: जिस चीन को अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही थी, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक गहराई से एकीकृत होता चला गया। इसे विश्लेषक “चीन को और महान बनाने” का अनपेक्षित नतीजा कहते हैं। ट्रंप की टैरिफ नीति का मूल आधार उनकी “अमेरिका फर्स्ट” विचारधारा में निहित था, जिसे ...