अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
लास्ज़लो क्रास्नाहोर्काई: साहित्य में कला की शक्ति का पुनरुत्थान “कला का दायित्व केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि अंधकार में भी अर्थ तलाशना है।” यह कथन हंगरी के महान लेखक लास्ज़लो क्रास्नाहोर्काई की साहित्यिक यात्रा को सही शब्दों में परिभाषित करता है। 9 अक्टूबर 2025 को स्वीडिश अकादमी ने उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि उनके लेखन ने “सर्वनाशकारी भय के बीच कला की शक्ति को पुनः स्थापित किया है।” यह सम्मान न केवल एक लेखक की विजय है, बल्कि संपूर्ण मध्य यूरोपीय साहित्यिक चेतना की पुनः प्रतिष्ठा भी है। जीवन और रचनात्मक यात्रा लास्ज़लो क्रास्नाहोर्काई का जन्म 1954 में ग्यूला (Gyula), हंगरी में हुआ — एक ऐसा क्षेत्र जो इतिहास, संघर्ष और सीमाओं की संवेदनाओं से भरा हुआ है। उन्होंने कानून और पत्रकारिता की शिक्षा ली, लेकिन जल्द ही साहित्य के उस मार्ग पर चल पड़े जहाँ शब्द मानव अस्तित्व के संकटों से संवाद करते हैं। 1980 के दशक में जब हंगरी साम्यवादी शासन के अंतिम दौर से गुजर रहा था, तब क्रास्नाहोर्काई की कलम ने व्यवस्था, निराशा और नैतिक पतन के भीतर भी अर्थ की खोज शुरू की। उ...