अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
संपादकीय: ट्रंप का यूएनजीए भाषण और भारत पर अनुचित निशाना संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया भाषण एक बार फिर उनकी अप्रत्याशित और विवादास्पद शैली को सामने लाया। इस भाषण में भारत को बार-बार निशाना बनाया गया, जिसमें ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त करने का श्रेय लिया और रूस-यूक्रेन युद्ध को भारत व चीन द्वारा वित्तपोषित बताया। ये दावे न केवल अतिशयोक्तिपूर्ण हैं, बल्कि तथ्यों से परे भी हैं। ट्रंप का यह रवैया न केवल भारत-अमेरिका संबंधों के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि वैश्विक कूटनीति में उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। ट्रंप ने अपने भाषण में दावा किया कि उन्होंने सात महीनों में सात युद्ध समाप्त किए, जिनमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष भी शामिल है। यह दावा हैरान करने वाला है, क्योंकि भारत ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर कोई अमेरिकी हस्तक्षेप नहीं हुआ। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। इसी तरह, ट्रंप का यह आरोप कि भारत रूसी तेल खरीदकर युद्ध ...