भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
वैश्विक तापमान में अभूतपूर्व वृद्धि: 2025 का तीसरा सबसे गर्म वर्ष परिचय वर्ष 2025 को वैश्विक तापमान के रिकॉर्ड में तीसरा सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया गया है। यूरोपीय संघ के Copernicus Climate Change Service (C3S) के अनुसार, 2025 का औसत वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर (1850–1900) से लगभग 1.47 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। यह 2023 से मात्र 0.01 डिग्री सेल्सियस कम था, जबकि 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2023 से 2025 की तीन वर्षीय अवधि में औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया, जो रिकॉर्ड में अब तक की सबसे लंबी ऐसी अवधि है जब तापमान इस महत्वपूर्ण सीमा को लगातार पार करता रहा। यह स्थिति स्पष्ट रूप से बताती है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है, जहां मानवीय गतिविधियां पृथ्वी के तापीय संतुलन को स्थायी रूप से प्रभावित कर रही हैं। वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वैश्विक तापमान की तुलना आम तौर पर पूर्व-औद्योगिक काल (1850–1900) से की जाती है, जब कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्...