अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
पुतिन की भारत यात्रा: क्या इससे भारत-रूस संबंधों को नया आकार मिलेगा? भू -राजनीतिक विश्लेषण भूमिका: बहुध्रुवीय विश्व में एक निर्णायक कूटनीतिक क्षण भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंध 4–5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के साथ एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच गए। यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद भारत की पहली राजकीय यात्रा है —एक ऐसी यात्रा जिसने न केवल वैश्विक आलोचना के वातावरण में रूस की एशिया-उन्मुख कूटनीति को प्रदर्शित किया, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को भी प्रमुखता से सामने रखा। ऐसे समय में जब अमेरिका रूस पर कड़े प्रतिबंध लागू कर रहा है और भारत पर मॉस्को से दूरी बनाने का अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ा रहा है, पुतिन की यह यात्रा बहुध्रुवीय भू-राजनीति में उभरते संतुलन का संकेत देती है। यह यात्रा केवल परंपरागत संबंधों के उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इस प्रश्न को जन्म देती है— क्या यह यात्रा भारत–रूस संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करेगी, या यह केवल मौजूदा दिशा को और मजबूत करेगी? इस लेख का मत स्पष्ट है: यह...