अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
बगराम एयरबेस विवाद - भारत की संतुलित विदेश नीति की नई झलक 7 अक्टूबर 2025 को मॉस्को में हुई “मॉस्को प्रारूप परामर्श” (Moscow Format Consultations on Afghanistan) की बैठक ने एक अप्रत्याशित लेकिन ऐतिहासिक मोड़ दिया। इस बैठक में भारत, तालिबान, पाकिस्तान, चीन और रूस एक साथ खड़े दिखाई दिए — और उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस योजना का विरोध किया जिसमें अमेरिका अफगानिस्तान के बगराम हवाई अड्डे पर दोबारा सैन्य कब्जा स्थापित करना चाहता है। यह संयुक्त रुख न केवल दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में नई दिशा दिखाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब “महाशक्तियों के साथ” नहीं, बल्कि “क्षेत्रीय हितों के साथ” खड़ा होना चाहता है। बगराम एयरबेस: अफगानिस्तान में अमेरिकी महत्वाकांक्षा का केंद्र बगराम हवाई अड्डा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। 1979 में यह सोवियत सेनाओं का प्रमुख ठिकाना था, और 2001 के बाद अमेरिकी सेनाओं ने इसे अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे के रूप में विकसित किया। यहां से अमेरिका ने दो दशकों तक आतंकवाद विरोधी अभियानों का संचालन किया।...