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इस लेख में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नए चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की नियुक्ति, उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें SEBI के कार्य, संरचना, उद्देश्यों और भारतीय शेयर बाजार में इसकी भूमिका को समझाया गया है। साथ ही, SEBI द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई है। यह लेख प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और नए अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे परिचय भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) भारत में पूंजी बाजार का प्रमुख नियामक निकाय है। इसकी स्थापना 1988 में हुई थी, और 1992 में इसे एक संवैधानिक दर्जा दिया गया। इसका मुख्य कार्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना और भारतीय शेयर बाजार को सुचारू रूप से संचालित करना है। हाल ही में, तुहिन कांत पांडे को SEBI का 11वां चेयरमैन नियुक्त किया गया है। SEBI का परिचय और महत्व 1. SEBI की स्थापना एवं उद्देश्य SEBI (Securities and Exchange Board of India) की स्थापना 1988 में सरकार द्वारा की गई थी, लेकिन 1992 में इसे अध...